हदीस की रौशनी में जानें- म’रने से पहले इन कामों को करना है ज़रूरी..

मौलाना तारिक जमील साहब अपने एक बयान में एक हदीस बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि चार बातें मुझ से ले लो दुनिया भी तुम्हारी होगी, और आखिरत भी तुम्हारी होगी। मौलाना फरमाते हैं कि अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि हमेशा सच बोलना, कभी झूठ न बोलना। हज़रत अबदुल्लाह बिन मसऊद रज़ी अल्लाहु अनहु से रिवायत है.

उन्होंने कहा अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया तुम सच्चाई को लाज़िम पकड़ो क्योंकि सच्चाई नेकी की तरफ़ रहनुमाई करती है और बेशक नेकी जन्नत के रास्ते पर चलाती है और आदमी हमेशा सच्च बोलता रहता है और कोशिश से सच्च पर क़ायम रहता है यहाँ तक कि वो अल्लाह के हाँ सिद्दीक़ (इंतिहाई सच्चा) लिख दिया जाता है (मुस्लिम:2607) दोस्तों हमेशा सच बोलना चाहिए, क्योंकि झूटा इंसान मुनाफिक कहा जाता जाता है, और उसकी बातों पर किसी को एतबार नहीं होता है, वहीं झूठ बोलने की वजह से इंसान की रोज़ी में भी कमी आती है, और वह परेशान हो जाता है।

Muhammad (PBUH)
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आगे मौलाना बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने फरमाया धोका न देना, मौलाना बयान करते हैं कि कभी किसी को धोका न देना, क्योंकि धोका देना मुस्लिम का काम नहीं है, जो धोका देगा वह कयामत के दिन शर्मिंदा होगा, क़यामत के दिन उसका चेहरा सियाह हो जाएगा। धोका देने वाला इंसान कभी कामियाब नहीं होगा। मौलाना बयान करते हैं कि आगे अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि अखलाक अच्छे करो, अच्छे इन्सान की सबसे पहली और सबसे आख़िरी निशानी ये है कि वो उन लोगों की भी इज़्ज़त करता है,जिनसे उसे किसी किस्म के फ़ायदे या मुफ़ाद की तवक़्क़ो नहीं होती है।

अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया,कामिल मोमिन वो है जिसके अख़लाक़ अच्छे हों।।(अबू दाऊद ४६८६)तो दोस्तों हमें चाहिए कि अपने अखलाक को अच्छे करें, किसी को गाली ने दें, किसी को सताएँ, बात बात पर गुस्सा न करें, बल्कि अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम के अखलाक को अपनाएं। आगे मौलाना बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि हलाल खाओ, अपनी रोज़ी को हलाक तालश करो, कभी हराम न खाओ।

मौलाना बयान करते हैं कि एक मर्तबा अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम की बारगाह में एक सहाबी बैठे हुये थे, और उनके हाथ बहुत सख्त थे, तो अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने उनसे फरमाया कि तुम्हारे हाथ इतने सख्त क्यों हैं, तो सहाबी ने अर्ज़ किया कि बच्चों के लिए काम करता हूँ, इस लिए हाथ सख्त हो गए हैं, तो अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने उनका हाथ चूम लिया, और फरमाया कि जो लोग मेहनत करके अपने बच्चों को हलाल रिज्क खिलाते हैं, उनके ऊपर जहन्नम की आग हराम होगी।

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