अमेरिका और ईरान के बीच संभावित नई वार्ता के लिए पाकिस्तान एक बार फिर अहम कूटनीतिक केंद्र बनता दिख रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर को पाकिस्तान भेजने का फैसला किया है, जहां वे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बातचीत कर सकते हैं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस फिलहाल यात्रा पर नहीं जा रहे हैं, लेकिन यदि वार्ता आगे बढ़ती है तो उन्हें भी इस्लामाबाद भेजा जा सकता है।
इस बीच, अब्बास अराघची ने खुद पुष्टि की है कि वह इस्लामाबाद जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका के साथ नई बातचीत का उल्लेख नहीं किया, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारी पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम वार्ता के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को रॉयटर्स से बातचीत में दावा किया कि ईरान अमेरिका की मांगों को पूरा करने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में है। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आगमन की पुष्टि करते हुए कहा कि अराघची वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारियों से मुलाकात कर शांति प्रयासों पर चर्चा करेंगे।
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने भी ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत कर वॉशिंगटन-तेहरान युद्धविराम समझौते की स्थिति पर चर्चा की। कतर ने कहा है कि वह पाकिस्तान की अगुवाई में चल रही मध्यस्थता को समर्थन देता रहेगा।
पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, अराघची की यह यात्रा संक्षिप्त होगी और मुख्य रूप से ईरान के प्रस्तावों को पाकिस्तान के माध्यम से वॉशिंगटन तक पहुंचाने पर केंद्रित रहेगी। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा है कि ईरान के पास अभी “एक अच्छा समझौता” करने का मौका है, बशर्ते वह अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को सत्यापन योग्य तरीके से छोड़ने के लिए तैयार हो।
हालांकि, अभी तक किसी नई औपचारिक वार्ता की पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले भी इस सप्ताह इस्लामाबाद में बातचीत की उम्मीद थी, लेकिन ईरान की अनिच्छा के कारण बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में अब दुनिया की नजर पाकिस्तान पर टिकी है, जहां आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों की नई दिशा तय हो सकती है।
