लोकसभा ने गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा पेश संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को खारिज कर दिया। सदन में मौजूद और मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से 298 ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 सदस्यों ने इसका विरोध किया। हालांकि, यह आंकड़ा संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से कम रहा, जिसके चलते यह बिल पारित नहीं हो सका।
बिल के खारिज होने के बाद केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 को भी वापस ले लिया। इन विधेयकों के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों में बढ़ोतरी, परिसीमन प्रक्रिया में बदलाव और महिला आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव था।
सरकार का प्रस्ताव था कि लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 850 की जाएं, जिनमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हों। इसके साथ ही संविधान के अनुच्छेद 82 में संशोधन कर 2026 के बाद होने वाली जनगणना का इंतजार किए बिना परिसीमन कराने का रास्ता खोलने की योजना थी।
विपक्ष ने इन प्रस्तावों का जोरदार विरोध किया। उनका कहना था कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण करने से दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। साथ ही, 2026-27 की जनगणना जारी रहने के बीच परिसीमन लागू करने को जल्दबाजी बताया गया।
हालांकि महिला आरक्षण को लेकर व्यापक सहमति दिखाई दी, लेकिन उसे परिसीमन से जोड़ने और पुराने आंकड़ों के आधार पर लागू करने पर विवाद बना रहा। महिला आरक्षण बिल में ओबीसी महिलाओं को अलग से आरक्षण ना दिया जाना भी विपक्षी दलों के विरोध का कारण बना। ऐसे में सरकार को संसद में बड़ा झटका लगा है और अब इस मुद्दे पर आगे की रणनीति पर नजर रहेगी।