अस्सलाम ओ अलैकुम दोस्तों, आज जुमा है और जुमे से जुड़ी जानकारी आज हम लेकर आये हैं. दोस्तों हम सभी जानते हैं कि पूरे हफ़्ते में जुमा एक ऐसा दिन है जिस दिन अधिक से अधिक लोग नमाज़ पढने के लिए निकलते हैं. मस्जिदों में अच्छी भीड़ होती है और लोग अल्लाह की इबादत करते हैं. रोज़ पांच वक़्त की नमाज़ जो लोग नहीं पड़ पाते वो भी जुमा पढने के लिए मस्जिद में जाते हैं. दोस्तों यूँ तो जुमा सभी के लिए फ़र्ज़ माना जाता है लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं जिन पर जुमा फ़र्ज़ नहीं है.

जिन लोगों पर जुमा फ़र्ज़ नहीं है उन्हें हम आठ केटेगरी में भाग सकते हैं. सबसे पहले तो उन लोगों पर जुमा फ़र्ज़ नहीं है जो सफ़र में हैं और मस्जिद तक नहीं जा सकते. जब हम सफ़र में होते हैं तो ये मुश्किल हो जाता है कि किस तरह से मसजिद में नमाज़ पढ़ें. दूसरे नंबर पर वो लोग आते हैं जो मरीज़ हैं. मरीजों को मस्जिद जाने में अगर दिक्क़त होती है तो उन पर जुमा फ़र्ज़ नहीं है. तीसरे नंबर पर हम बात करें तो औरतों की बात है. औरतों पर जुमा फ़र्ज़ नहीं है. सभी मर्दों पर जुमा फ़र्ज़ है लेकिन औरतों पर जुमा फ़र्ज़ नहीं है.

मस्जिद

चौथे नंबर पर आते हैं वो लोग जो पागल हैं. मानसिक रूप बीमार लोगों पर जुमा फ़र्ज़ नहीं है.इसके बाद नंबर पांच पर आते हैं बच्चे. बच्चों पर भी जुमा फ़र्ज़ नहीं है. नबी करीम सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने फरमाया जुम्मा हर बालिग मर्द पर फ़र्ज़ है. इसका अर्थ यही है कि बच्चों पर जुमा फ़र्ज़ है. नुम्बर 6 पर आते हैं वो लोग जो नाबीना हैं या अपाहिज हैं और मस्जिद नहीं जा सकते. ऐसे लोगों पर जुमा फ़र्ज़ नहीं है.

इसके अतिरिक्त आठवें नंबर पर आते हैं वो लोग जिनको हाकिम या बादशाह का डर हो कि वह जुल्मों सितम करेंगे ऐसे लोगों पर भी जुम्मे के लिए जाना फर्ज नहीं है. दोस्तों ये वो आठ लोग हैं जिन पर जुमे की नमाज़ फ़र्ज़ नहीं है. हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी ये पोस्ट पसंद आयी होगी. पसंद आयी तो शेयर ज़रूर करिए.

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