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तेल अवीव: इजरायल की राजनीति में अरब समुदाय की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। कभी सीमित राजनीतिक प्रभाव और सैन्य शासन का सामना करने वाला यह समुदाय आज अपनी चुनावी ताकत के दम पर सरकार गठन के समीकरण प्रभावित करने की स्थिति में पहुंच गया है। अक्टूबर 2026 के चुनाव के शुरुआती अनुमानों में अरब दलों को संयुक्त रूप से 19 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। यदि ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो संसद में उनका प्रतिनिधित्व पिछले चुनावों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाएगा।

इजरायल की लगभग 21 प्रतिशत आबादी अरब समुदाय से संबंधित है। इसमें मुस्लिम, ईसाई और द्रूज शामिल हैं। समुदाय के कई सदस्य स्वयं को इजरायल के फिलिस्तीनी नागरिक के रूप में पहचानते हैं। उनकी राजनीतिक प्राथमिकताओं में नागरिक अधिकार, शिक्षा, रोजगार, आवास, अपराध नियंत्रण और फिलिस्तीनी मुद्दा प्रमुख रहे हैं।

सैन्य शासन से राजनीतिक चेतना तक

1948 में इजरायल की स्थापना के बाद देश की सीमाओं के भीतर रह गए फिलिस्तीनियों के एक हिस्से को इजरायली नागरिकता मिली। हालांकि, 1948 से 1966 तक अरब नागरिकों के अनेक क्षेत्रों में सैन्य शासन लागू रहा। इसके बावजूद अरब नागरिकों ने चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी जारी रखी।

1976 का भूमि दिवस अरब राजनीतिक चेतना के इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान छह अरब नागरिक मारे गए। इस घटना ने भूमि अधिकारों, समानता और फिलिस्तीनी पहचान से जुड़े सवालों को समुदाय की राजनीति के केंद्र में ला दिया।

स्वतंत्र राजनीतिक दलों का उदय

1970 के दशक से अरब राजनीति में स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत होने लगी। हदाश जैसे वामपंथी मंचों के साथ बलद, तआल और राम जैसे दलों ने भी अपनी जगह बनाई। इन दलों की रणनीतियां अलग-अलग रहीं, लेकिन अरब नागरिकों के अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व इनके प्रमुख मुद्दे बने रहे।

2015 में हदाश, तआल, बलद और राम ने मिलकर जॉइंट लिस्ट गठबंधन बनाया। इसने अरब मतदाताओं को एक साझा राजनीतिक मंच दिया। 2020 के चुनाव में गठबंधन ने 15 सीटें जीतकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। हालांकि, वैचारिक मतभेदों के कारण बाद में यह गठबंधन टूट गया।

2021 में सरकार में भागीदारी

2021 में राम पार्टी ने नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होकर इजरायली राजनीति में नया अध्याय जोड़ा। स्वतंत्र अरब पार्टी पहली बार सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा बनी। इस रणनीति का उद्देश्य अरब समुदाय के लिए बजट, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े फैसलों में प्रभाव हासिल करना था।

इस घटनाक्रम ने साबित किया कि अरब दल केवल विपक्ष में रहकर ही नहीं, बल्कि सरकार गठन में भाग लेकर भी अपनी मांगें आगे बढ़ा सकते हैं।

2026 के चुनाव में अहम भूमिका

अक्टूबर 2026 के चुनाव के शुरुआती अनुमानों में अरब दलों को संयुक्त रूप से 19 सीटें मिलने की संभावना जताई गई। इसी बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 और विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिलने का अनुमान था। इजरायली संसद नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं।

यदि अरब दल विपक्ष का समर्थन करते हैं, तो उसके पास 67 सीटों का संभावित समर्थन हो सकता है। हालांकि, वैचारिक मतभेदों और गाजा तथा लेबनान से संबंधित नीतियों पर असहमति के कारण ऐसा गठबंधन बनना निश्चित नहीं है।

अरब समुदाय की बढ़ती राजनीतिक ताकत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब उसके समर्थन के बिना सरकार गठन का रास्ता निकालना पहले से अधिक कठिन हो सकता है। हालांकि, चुनावी प्रतिनिधित्व को वास्तविक सामाजिक समानता, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और नीतिगत बदलाव में बदलना अब भी उसकी सबसे बड़ी चुनौती है।

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