लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने छह सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) पांच सीटें जीतने में सफल रही। 29 अक्टूबर को सामने आए अंतिम नतीजों ने स्पष्ट कर दिया कि भाजपा ने बढ़त तो बनाए रखी, लेकिन सपा ने भी उसे कड़ी चुनौती दी। अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इन नतीजों को दोनों दलों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन चुनावों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर मुकाबला हुआ था। मतदान 23 अक्टूबर को हुआ, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर से शुरू हुई। चुनाव में कुल 152 उम्मीदवार मैदान में थे।
भाजपा ने शिक्षक सीटों पर बनाई पकड़, सपा ने स्नातक क्षेत्रों में किया बेहतर प्रदर्शन
चुनाव परिणामों में भाजपा ने छह में से चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की, जबकि सपा को दो सीटें मिलीं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में तस्वीर सपा के पक्ष में रही। पांच में से तीन सीटें सपा और दो भाजपा के खाते में गईं। इससे स्पष्ट है कि भाजपा ने कुल सीटों पर बढ़त कायम रखी, लेकिन स्नातक मतदाताओं के बीच सपा का प्रदर्शन मजबूत रहा।
किस सीट पर किसने दर्ज की जीत?
| निर्वाचन क्षेत्र | विजेता | पार्टी |
| मेरठ स्नातक | दिनेश कुमार गोयल | भाजपा |
| आगरा स्नातक | डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह | भाजपा |
| इलाहाबाद-झांसी स्नातक | डॉ. मान सिंह यादव | सपा |
| लखनऊ स्नातक | कांति सिंह | सपा |
| वाराणसी स्नातक | आशुतोष सिन्हा | सपा |
| मेरठ शिक्षक | श्रीचंद शर्मा | भाजपा |
| लखनऊ शिक्षक | उमेश द्विवेदी | भाजपा |
| बरेली-मुरादाबाद शिक्षक | डॉ. हरि सिंह ढिल्लों | भाजपा |
| गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक | ध्रुव कुमार त्रिपाठी | भाजपा |
| वाराणसी शिक्षक | लाल बिहारी यादव | सपा |
| आगरा-अलीगढ़ शिक्षक | डॉ. आकाश अग्रवाल | सपा |
सभी 11 सीटों के अंतिम परिणामों में भाजपा को छह और सपा को पांच सीटें मिलीं।
सपा के लिए क्यों अहम हैं ये नतीजे?
सपा ने पिछली बार की तुलना में अपना प्रदर्शन बेहतर किया है। 2020 में इन 11 सीटों में भाजपा के पास छह, सपा के पास तीन और दो सीटों पर निर्दलीय सदस्य थे। इस बार सपा ने पांच सीटें जीतकर दो अतिरिक्त सीटें हासिल कीं, जबकि भाजपा की कुल सीटों की संख्या छह ही रही।
इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में डॉ. मान सिंह यादव की जीत और लखनऊ तथा वाराणसी स्नातक सीटों पर सपा की सफलता ने पार्टी को खास बढ़त दी। दूसरी ओर, भाजपा ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अपना प्रभाव बनाए रखा और गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी की जीत के साथ महत्वपूर्ण मुकाबला अपने नाम किया।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्या संकेत?
इन नतीजों को भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। भाजपा ने कुल सीटों में बढ़त बनाए रखी, लेकिन सपा ने यह दिखाया कि वह कुछ महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा को कड़ी चुनौती दे सकती है।
हालांकि, विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव का मतदाता आधार विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इसलिए इन नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव का पूर्वानुमान नहीं माना जा सकता।
कुल मिलाकर, भाजपा ने छह सीटें जीतकर अपनी बढ़त कायम रखी, जबकि सपा की पांच सीटों की जीत ने मुकाबले को पहले से अधिक दिलचस्प बना दिया। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के लिए यह नतीजा अपने संगठन, मतदाता संपर्क और राजनीतिक रणनीति का आकलन करने का अवसर है।
