Sun. Apr 21st, 2024

दोस्तों आप सभी जानते है की जु’मा के दिन की अहे’म फ़ज़ी’लत है इसलिए जु’मे के दिन की कुछ अ’लग सु’न्नते भी है और कुछ खास’तौर पर अम’ल भी बताया है गया है दोस्तों आज हम जु’मे के दिन का खास अम’ल के बारे में बात करेंगे, जु’मे के दिन के अलग अह’काम है प्यारे न’बी करी’म सल्ल० ने जु’मे के दिन की कई सारी फ़ज़ी’लत बताई है, जुमे के दिन खू’ब ध्या’न से कु’तबा सुनने वालो की 10 दिन की गु’नाह मा’फ़ कर दी जाती है.

हज़’रत अबू हुरै’रा रज़ि’यल्लाहु अन्हु से रि’वा’यत है की न’बी करी’म सल्ल० ने इरशाद फ़’रमा’या जो शख्स अच्छी तरह व’ज़ू करता है फिर जु’मा की नमा’ज़ के लिए आता है खू’ब ध्या’न से कुत’बा सुन’ता है और क़ु’त्बे के दौ’रान खा’मोश रहता है तो इस जु’मे से गु’ज़िश्ता जु’मा तक और म’ज़ीद 3 दिन के गु’नाह मा’फ़ कर दिए जाते है. और जिस शख्स ने कंक’रियों को हाथ लगा’या या’नि दौ’रान खु’त्बा उनसे खेल’ता रहा (चटा’ई, कप’डा वगे’रा से खेलता रहा ) तो उसने फ़ि’ज़ूल का’म कि’या.(मुस्लिम,1/283 )

जु’मा के दि’न फ’ज़र की नमा’ज़ से पहले ये दु’आ पढ़े तो सरे गु’नाह मा’फ़ हो जाते है- हज़’रत अ’नस र’ज़ि० अन्हु से मर’वी है की न’बी क’रीम स’ल्ल० ने इर’शाद फ़र’माया- जो श’ख्स जु’मा के दिन फ’ज़र की न’माज़ से पहले 3 म’र्तबा (अस्त’ग़्फ़िरूल्ला’हल्लाजी ला इला’हा इ’ल्ला हु’वल ह’य्युल क़’य्यूम व अ’तूबु इ’लय्हि) पढ़े तो अ’ल्लाह-ता’ला उसके गु’ना’हों की मग’फिरत फर’मा दें’गे चा’हे उस’के गुना’ह स’मुन्दर के झा’ग के बरा’बर हो ( रावा’ह इब्नु’ल सु’न्नी क़ज़ा’फ़ी अम’ल अल यौ’म 83 )

जु’मा के दिन फ’ज़र की न’माज़ बा-जमा’त प’ढ़िए गु’नाह मा’फ़- हज़’रत अ’बू उबे’दा र’ज़ी० अ’न्हु से रि’वा’यत है की न’बी करी’म स’ल्ल० इर’शाद फ़र’मा’या- जु’मा के दि’न फ’ज़र की नमा’ज़ बा-जमा’त पढ़’ने से को’ई न’माज़ अफ़’ज़ल न’हीं है और मे’रा गु’मान ये है की जो श’ख्स फ’ज़र की न’माज़ बा-ज’मात पढ़े’गा उस’की ज़’रूर बा ज़रूर मग’फिर’त कर दी जाए’गी ( कं’ज़ुल उम्मा’ल- 7/369)

जु’मा की नमा’ज़ से फा’रिग हो’कर सुभा’नल्ला’हिल अज़ी’मी व बिह’म्दि’हि 100 म’र्तबा क’हा क’रो, आप के एक ला’ख और वा’ल्देन के 24 ह’ज़ार गु’नाह मा’फ़ कर दिए जाएं’गे- हज़’रत इ’ब्ने अ’ब्बास र’ज़ी० अ’न्हु से रिवा’यत है की न’बी क’रीम स’ल्ल० ने इर’शाद फ़’रमाया-जि’स श’ख्स ने जु’मा की न’माज़ से फा’रिग होकर ( सुभा’नल्ला’हिल अ’ज़ी’मी व बिह’म्दि’हि ) 100 म’र्त’बा पढ़ा तो अल्ला’ह ता’ला उसके एक ला’ख गु’नाह मा’फ़ फर’मा देंगे, और उसके वा’ल्देन की 24 हज़ा’र गुना’ह मा’फ़ कर दिए जा’एंगे(रावा’ह इब्नु’ल सु’न्नी फि अ’मल अल यौ’म , 164)

जु’मे के दि’न सु’रह कह’फ़ पढ़’ने की फ़ज़ी’लत- हज़’रत इ’ब्ने उ’मर र’ज़ी० अ’न्हु से रि’वा’यत है की न’बी करी’म स’ल्ल० ने इर’शा’द फ़र’मा’या-” जो श’ख्स जु’मा के दिन सूर’ह क’हफ़ की ति’ला’वत करेगा उसके क़’दम से लेकर आ’समा’न की बु’लंदी तक नूर हो जाएगा जो क़’या’मत के दिन रौश’नी देगा और गुज़ि’श्ता जु’मा से इस जु’मा तक के उसके सब गु’नाह मा’फ़ हो जाएंगे ( सगी’रा गुना’ह मुरा’द है) ” (कंज़ु’ल उम्मा’ल, 1/576 )

जुमे कि रा’त में सु’रह या’सीन प’ढ़ने की फ़’ज़ीलत- हज़’रत अ’बू हुरै’रा र’ज़ी० अ’न्हु से रिवा’यत है है की न’बी क’रीम स’ल्ल० ने इर’शाद फ़र’माया- “जिसने श’बे-जु’मा में सु’रह या’सी’न प’ढ़ी उसकी मग’फि’रत कर दी जाएगी”. (तर’ग़ीब- 1/514)

जु’मे की न’मा’ज़ के बाद (सु’रह फा’तिहा, सु’रह इख’लास और सु’रह मौ’जातीँ) 7 7 म’र्तबा प’ढ़िए तो सरे गु’नाह मा’फ़ हो जा’एंगे
ह’ज़रत आ’यशा र’ज़िय’ल्लाहु अ’न्हा से रिवा’यत है की न’बी करी’म स’ल्ल० ने इ’रशा’द फ़र’मा’या- “जो श’ख्स जु’मा की नमा’ज़ के बाद सु’रह अह’द, सुरह फ’लक, सुरह ना’स सात-सात मर्त’बा पढ़े तो अल्ला’ह रब्बु’ल इज़्ज़’त आने वाले जु’मा तक बुरा’ई से पना’ह में रखें’गे “(इ’ब्ने सु’न्नी फि अम’लाल यौ’म वाल ले’लाह -1/145 ) और क़’सीरी की रि’वायत में अ’ल्फ़ाज़ ह’दीस इस तर’ह है- जो श’ख्स जु’मा के दि’न इ’माम के सला’म फे’रने के बाद उसी हा’लत में बै’ठे हुई (सु’रह फा’तिहा, सु’रह अ’हद , सुर’ह फल’क, सुर’ह ना’स) सात-सात मर्त’बा पढ़े तो उसके अग’ले पिछ’ले गु’ना’हों की मग’फिर’त कर दी जाए’गी .और जितने लोग अ’ल्ला’ह और क़या’मत के दिन पर ई’मान रखते है उनके अ’दद के बा-क़’द्र उसको अ’ज्र आता किया जा’एगा

जिसने जु’मा के दिन अपने वा’ल्डेन या उनमे से किसी की ज़ि’या’रत की उसके गु’ना’ह मा’फ़ कर दिए जा’एंगे, हज़’रत अ’बू हुरै’रा रज़ि’यल्ला’हु अ’न्हु से रिवा’यत है की न’बी करी’म स’ल्ल० इर’शा’द फ़र’मा’या- ” जो श’ख्स जु’मा के दिन अपने वा’ल्देन ya उनमे से किसी एक की क़’ब्र की ज़ि’या’रत करे तो उसकी मग’फि’रत कर’दी जाए’गी और उसको फर्मा’बर’दार लिखा जा’एगा (कं’ज़ुल उ’म्मा’ल, 17/468)

अस’र के न’मा’ज़ के फ़ौर’न बाद अपनी ज’गह पर बै’ठे हु’वे .(अल्ला’हुम्मा स’ल्ली आ’ला मुहम्म’दी नीं नबी’य्यिल उ’म्मिय’यी व आला आ’लि’हि व सली’म त’स्ली’मा ) 80 मर्त’बा पढ़े इंशा’अल्ला’ह 80 साल की इबा’दत का सवा’ब मिलेगा 80 सा’ल के गु’ना’ह मा’फ़ होंगे…

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