लखनऊ, 11 मई 2026:
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने आज बख्शी का तालाब तहसील कार्यालय पहुंचकर उपजिलाधिकारी सहिल कुमार को ग्राम पंचायत मलूकपुर के अंतर्गत स्थित नौवापुरवा गांव की गंभीर समस्याओं के संबंध में ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने गांव में मूलभूत नागरिक सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाते हुए तत्काल स्थल निरीक्षण और समयबद्ध कार्यवाही की मांग की।

लगभग 200 की आबादी वाले नौवापुरवा में अधिकांश दलित और निर्माण मजदूर परिवार निवास करते हैं। राजधानी लखनऊ से बहुत कम दूरी पर स्थित होने के बावजूद गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। गांव में जल जीवन मिशन के तहत नल द्वारा जल आपूर्ति उपलब्ध नहीं है, अधिकांश परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं, पक्की नालियों और जल निकासी व्यवस्था का अभाव है, प्राथमिक विद्यालय और आंगनवाड़ी केंद्र नहीं है तथा श्मशान/मुरदाघर की भी कोई व्यवस्था नहीं है। गांव में केवल खड़ंजा मार्ग है, पक्की सड़क नहीं है, जिससे बरसात के दौरान आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित होता है। महिलाओं के लिए किसी भी प्रकार के रोजगार या कौशल विकास केंद्र की सुविधा उपलब्ध नहीं है और वृद्धावस्था एवं विकलांग पेंशन के पात्र लोगों को भी नियमित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह स्थिति केवल विकास की कमी नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन की विफलता को उजागर करती है। एक ओर सरकार गांवों तक विकास पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर नौवापुरवा जैसे गांव आज भी बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि 7 दिनों के भीतर संबंधित विभागों के साथ संयुक्त स्थल निरीक्षण कर समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन की इटौंजा लोकल कमेटी के इंचार्ज शान्तम ने कहा, “राजधानी लखनऊ से कुछ ही किलोमीटर दूर बसे नौवापुरवा की स्थिति सरकार के विकास मॉडल की वास्तविकता को उजागर करती है। जिन योजनाओं को हर गांव तक पहुंचाने का दावा किया जाता है, वे आज भी यहां के लोगों तक नहीं पहुंची हैं। दलित और गरीब मेहनतकश परिवार बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं जबकि सरकार कागजों में विकास के दावे कर रही है। अगर प्रशासन ने शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की तो पार्टी स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक आंदोलन चलाएगी।”

इटौंजा लोकल कमेटी के सचिव राहुल ने कहा, “पीने का पानी, सड़क, नाली, स्कूल, आंगनवाड़ी और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। हमने SDM सहिल कुमार से स्पष्ट रूप से कहा है कि अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि समयबद्ध कार्यवाही चाहिए। प्रशासन को गांव में जाकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।”

लोकल कमेटी सदस्य स्वाति ने कहा, “गांव की महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पानी, शौचालय और रोजगार की सुविधाओं के अभाव का सबसे अधिक बोझ महिलाओं पर पड़ता है। महिलाओं के लिए सिलाई केंद्र और कौशल विकास कार्यक्रम तत्काल शुरू किए जाने चाहिए।”

लोकल कमेटी सदस्य बहादुर ने कहा कि बरसात के समय गांव की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। उन्होंने कहा कि सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव लोगों के जीवन को लगातार संकटपूर्ण बनाता है।

स्थानीय निवासी रामावती ने कहा, “हम लोग वर्षों से इन समस्याओं को झेल रहे हैं लेकिन आज तक कोई अधिकारी गांव की हालत देखने नहीं आया। हम चाहते हैं कि प्रशासन गांव में आकर खुद स्थिति देखे और समस्याओं का समाधान करे।”

स्थानीय निवासी माधुरी ने कहा, “आंगनवाड़ी और स्कूल न होने से बच्चों की पढ़ाई और पोषण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। गांव की महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।”

प्रतिनिधिमंडल में शान्तम (इंचार्ज, इटौंजा लोकल कमेटी), राहुल (सचिव, इटौंजा लोकल कमेटी), स्वाति, बहादुर, गुड्डू, रामावती और माधुरी शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समयावधि में कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की जाती है तो नौवापुरवा के निवासी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के नेतृत्व में तहसील स्तर पर प्रदर्शन, धरना और लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेंगे।

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