ईरान और अमेरिका के बीच घोषित दो हफ्ते के युद्धविराम के कुछ ही घंटों बाद लेबनान पर इज़राइल के भीषण हवाई हमलों ने क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को इन हमलों में बड़ी संख्या में लोगों, जिनमें आम नागरिक भी शामिल हैं, के मारे जाने और घायल होने की खबरों को “भयावह” और “हैरान करने वाला” बताया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने बयान जारी कर कहा कि लेबनान में आज जिस स्तर की तबाही और जनहानि हुई है, वह बेहद डरावनी है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम पर सहमति बनने के कुछ घंटों के भीतर इस तरह का नरसंहार किसी भी विश्वास से परे है और इससे उस नाजुक शांति पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिसकी नागरिकों को सख्त जरूरत है।
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार टीम ने बेरूत में एक हमले की जगह का दौरा किया, जहां मलबे के बीच कई शव देखे गए। इज़राइल ने दावा किया है कि उसने हिज़्बुल्लाह के 100 से अधिक कमांड सेंटरों को निशाना बनाया। हमले बेरूत, बेक्का घाटी और दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में किए गए।
लेबनान के नागरिक सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को देशभर में हुए इज़राइली हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 254 हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार टायर के पास अल-अब्बासिये इलाके में हिराम अस्पताल के सामने एक इमारत पर हुए हमले में चार लोगों की मौत हुई और अस्पताल को भी नुकसान पहुंचा। वहीं, क्लैलेह में इस्लामिक हेल्थ अथॉरिटी की एक एम्बुलेंस पर हमले में तीन लोगों के मारे जाने की खबर है।
वोल्कर तुर्क ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून साफ तौर पर कहता है कि नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की हर हाल में सुरक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने सभी कथित उल्लंघनों की तुरंत स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इन हमलों ने यह संकेत दे दिया है कि ईरान युद्धविराम के बावजूद लेबनान मोर्चे पर तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता का खतरा गहरा गया है।