मध्य पूर्व में 40 दिनों तक चले भीषण संघर्ष और हालिया दो हफ्ते के युद्धविराम के बीच ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत की नई कोशिशें तेज हो गई हैं। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ़ के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचा है, जहां अमेरिकी पक्ष के साथ अहम वार्ता होने की संभावना है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल में सुरक्षा, राजनीतिक, सैन्य, आर्थिक और कानूनी समितियों के सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाकिर ज़ोलघद्र, रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदियान, सेंट्रल बैंक गवर्नर अब्दोल्नासेर हेम्मती और संसद के कुछ सदस्य भी क़ालिबाफ़ के साथ पहुंचे हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि औपचारिक वार्ता तभी शुरू होगी जब अमेरिकी पक्ष उसकी पूर्व शर्तों को स्वीकार करेगा।

अमेरिकी पक्ष से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, मध्य पूर्व के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर भी इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उसके सशस्त्र बलों की “ताकत के प्रदर्शन” और जनता के समर्थन के बाद अमेरिका और इज़राइल को युद्धविराम की पेशकश करनी पड़ी। ईरान ने दो हफ्ते के संघर्षविराम को स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन साफ चेतावनी दी है कि यदि उसकी शर्तों के अनुरूप समझौता नहीं हुआ और संघर्ष दोबारा शुरू हुआ, तो वह क्षेत्र में अमेरिकी हितों और इज़राइल को फिर निशाना बनाएगा।

इस वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि होरमुज जलडमरूमध्य, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंध और क्षेत्रीय संगठनों के भविष्य जैसे मुद्दे इस बातचीत के केंद्र में रहने वाले हैं। अगर इस्लामाबाद वार्ता सफल होती है, तो यह मध्य पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।

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