भुवनेश्वर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने शनिवार को उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में विजन इंडिया प्रोग्राम के तहत आयोजित होलेस्टिक हेल्थ समिट को सम्बोधित किया।
श्री अखिलेश यादव समिट में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज लोग बीमारी, स्वास्थ्य के साथ-साथ मनोभावों की भी बात कर रहे हैं। इस विषय पर होलेस्टिक एप्रोच और हेल्दी लाइफ स्टाइल पर चर्चा होना जरूरी है। होलिस्टिक हेल्थ में फिजीकल हेल्थ, फिटनेस, हेल्दी फूड, पाजिटिव सोशल सपोर्ट, हैपी वर्किंग कंडीशन हो, माहौल अच्छा हो इसीलिए होलिस्टिक हेल्थ पर फोकस किया गया है।
श्री अखिलेश यादव ने कहा कि कभी-कभी स्वास्थ्य सेवाएं फेल हो जाती है। जब स्वास्थ्य सेवाएं फेल होती है तो मेडिकल सेवाएं शुरू होती है। हेल्थ प्रीवेंटिव कन्सेप्ट है। मेडिकल क्यूरेटिव कान्सेप्ट है। जब होलिस्टिक हेल्थ पर फोकस करेंगे तो लोग बीमार कम होंगे। उससे लोग खुशहाली और तरक्की करेंगे। लोगों का तन और मन स्वस्थ होगा। आसपास का माहौल, कार्यस्थल का वातावरण, फ्रेंड सर्किल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। आजकल देखा जा रहा है कि नकारात्मक चीजे ज्यादा आती है। नेगेटिविटी लोगों पर असर डालती है। कई बार वाट्सएप ग्रुपों पर तमाम चीजें आती है, जो प्रभाव डालती है। सामाजिक और राजनीतिक वातावरण, वेदर क्लाइमेट भी असर डालता है। दिल्ली का प्रदूषण, इंदौर का दूषित जलापूर्ति समेत तमाम जगहों के मामले है, जो लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं। इंदौर को तो सफाई में एवार्ड मिलता था उसी शहर में पीने के पानी से मौतें हो गयी। इसी तरह से वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े मामले हैं। होलेस्टिक हेल्थ में लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली सभी चीजें शामिल है।
श्री अखिलेश यादव ने कहा कि पर्यावरण और आसपास का माहौल जितना अच्छा होगा स्वास्थ्य उतना अच्छा होगा। श्री यादव ने कहा कि आंकड़ों के हिसाब से देश में हेलेस्टिक हेल्थ की स्थिति 30 फीसदी ही है। पीएचसी, सीएचसी की स्थितियां अच्छी नहीं है। आपातकालीन सेवाएं लगभग खत्म हो गयी हैं। उत्तर प्रदेश में तो इमरजेंसी सेवाओं की मौत हो गयी है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। गांवों की आबादी के स्वास्थ्य का कोई आंकड़ा ही नहीं है। आशा वर्कर से काम ज्यादा लिया जाता है। जो काम लिया जाता है उनको उचित मानदेय नहीं दिया जाता है। होलिस्टिक हेल्थ के लिए सरकारों को एनवायरमेंटल फैक्टर पर ध्यान देना चाहिए। नदियों की सफाई नहीं है, औद्योगिक वेस्ट नदियों में जा रहा है। वही गंदा पानी खेतों में जा रहा है। वह असर डालता है।
देखा जा रहा है कि योग पर बड़े-बड़े भाषण होते हैं लेकिन स्कूल-कालेजों में बच्चों को जानकारी देने का कोई सिस्टम नहीं है। सम्पूर्ण स्वास्थ्य को लेकर सरकारों का योगदान संतोषजनक नहीं है। जो जरूरी आधारभूत ढांचा होना चाहिए। वह नहीं है। पर्यावरण के कारक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते है लेकिन स्वास्थ्य विभाग कहता है कि हमारा विषय नहीं है। होलेस्टिक हेल्थ को लेकर आज बड़ी चुनौतियां है। मेडिकल के साथ ही सोशल चुनौती भी है। लोगों को जागरूक करना पड़ेगा। कई बार सामाजिक रूकावटें आती है। जिनके कारण प्रोग्राम लागू नहीं हो पाते है। इसके लिए भी लोगों को जागरूक कारना होगा, शिक्षित करना होगा। लोगों को बताना पड़ेगा कि स्वास्थ्य कितना बड़ा और जरूरी मुद्दा है। प्रोएक्टिव वेलनेस पर ध्यान देना होगा। यह तभी होगा जब लोग जागरूक होंगें। आज डिजिटल मेडिकल सेवाएं तैयार करने की जरूरत है। खुद को एक दायरे में लाना होगा। आहार-विहार- आचार-विचार को लेकर एक संकल्प लेना होगा। सरकारों को आधारभूत ढांचे पर काम करना होगा। लोगों की आर्थिक मदद करनी होगी। आधुनिक चिकित्सा, आयुष पर ध्यान देना होगा। हेल्थ में निवेश करना चाहिए। खर्च पर नहीं सोचना चाहिए। आशा वर्कर लोगों को जागरूक करने का काम करती है। वे स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ है। उनकी सर्विस सिक्योरिटी होनी चाहिए। डाक्टरों, नर्सों, आशा वर्कर के लिए आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा होनी चाहिए। ये जमीन पर कार्य करते हैं। अगर वे खुद चिंता में रहेंगे तो हेल्थ को कैसे बेहतर कर पाएंगे।
श्री यादव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को टेली मेडिसन से जोड़ना होगा। नियमित मेडिकल चेक करायें। समाजवादी सरकार में सभी जांचें मुफ्त थी। सरकारों को सभी जांचों को फ्री करनी चाहिए। स्वास्थ्य नागरिक अर्थव्यवस्था में मानव संसाधन है। समाजवादी सरकार बनने पर स्वास्थ्य को पहली प्राथमिकता दी जायेगी। स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त बजट का आवंटन होगा। किसी को बजट की शिकायत नहीं होगी। स्वास्थ्य के ढ़ांचे को अन्य ढ़ाचें के बराबर महत्व दिया जायेगा। लाइसेंस मामले को सरल बनाने के साथ-साथ चौकन्ना बनाना पड़ेगा। दवाएं बनाने में किसे-किसे लाइसेंस दिया जा रहा है, किस उद्देश्य के लिए दिया जा रहा है। देखा गया कि कोडीन कफ सिरप के मामले में सरकार के बड़े-बड़े लोग शामिल हैं और इससे बच्चों का बहुत नुकसान हुआ।
श्री अखिलेश यादव ने कहा कि कोई बीमार होता है तो दोहरे आर्थिक नुकसान में पड़ जाता है। एक तरफ इलाज का खर्च दूसरी तरफ काम भी छूट जाता है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान विधायकों को क्षेत्र विधायक निधि से 25 लाख रुपये तक लोगों के इलाज के लिए मदद का नियम बनाया गया। इसका मकसद था कि विधायक अपने क्षेत्र के गरीब लोगों की आर्थिक मदद कर सके। देश में पहली बार यह योजना यूपी में शुरू की गयी।
होलिस्टिक हेल्थ के लिए देश में स्वास्थ्य को एक जनआंदोलन का रूप देना होगा। स्वास्थ्य के लिए प्रिवेन्टिव कार्य करना होगा जिससे लोग बीमार न हो। इसके लिए शुरुआत से ही स्वास्थ्य शिक्षा पर ध्यान देना होगा। कोडीन कफ सिरप मामला उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों और कई देशों तक फैला था। रेगुलेटरी प्रक्रिया, ईमानदार बनायेगी। डिजीटल तकनीक को मजबूत कर स्वास्थ्य सूचनाएं जन-जन तक पहुंचायी जायेगी। क्रियेटिव रूप से खेल-खेल में स्वस्थ्य रहने का तरीका सिखाया जायेगा। एआई का सही प्रयोग कर हर क्षेत्र की हेल्थ ज्योग्राफी पता की जाएगी। उस पर नज़र रखी जाएगी। टेली मेडिसिन को हर पंचायत से जोड़ा जाएगा। जांचों के लिए होम सर्विस की व्यवस्था होगी। डाक्टरों की सलाह मोबाइल पर शुरू की जाएगी। सीएसआर फंड का ज्यादा हिस्सा हेल्थ सेक्टर को दिया जायेगा। नर्सिंग स्टाफ के लिए अतिरिक्त ट्रेनिंग सेन्टर विकसित करेंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 360 डिग्री एप्रोच अपनानी होगी। डाइट, हाइट, वेट, योगा, डेन्टल, फिटनेश, हेल्थ, सबको जोड़कर काम करना होगा। फेमिली प्लानिंग की पॉलिसी समझाई जाए। हेल्दी इंडिया स्लोगन नहीं मिशन होना चाहिए।
कार्यक्रम में सांसद श्री राजीव राय, पूर्व मंत्री श्री अभिषेक मिश्र तथा पूर्व आईएएस श्री आलोक रंजन ने सक्रिय प्रतिभाग किया।