लखनऊ लोकसभा सीट: क्या रविदास मेहरोत्रा दे सकेंगे भाजपा को उसके गढ़ में चुनौती

Lucknow Loksabha Seat

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ राजनीति का बड़ा सेंटर माना जाता है. लखनऊ लोकसभा सीट भी बड़ी राजनीतिक हस्तियों का गढ़ रही है. पिछले कई दशकों से लखनऊ लोकसभा सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है. भाजपा उस दौर में भी इस सीट पर मज़बूत रही है जब उत्तर प्रदेश में भाजपा की स्थिति बहुत ख़राब हो गई थी.

अटल बिहारी वाजपेई की विरासत:
लखनऊ निर्वाचन क्षेत्र को तब महत्व मिला जब भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने लखनऊ से चुनाव लड़ने का फैसला किया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कई बार लखनऊ सीट से चुनाव जीता.

भाजपा का दबदबा:

लखनऊ में भाजपा परंपरागत रूप से मज़बूत रही है और इसका एक कारण ये भी है कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने इस सीट पर कभी विशेष ध्यान नहीं दिया. इसका फ़ायदा भाजपा नेताओं को मिला और कुछ ही समय में लखनऊ भाजपा का गढ़ बन गया. यहाँ से लालजी टंडन और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने चुनाव जीता है.

2014 के बाद के चुनाव:

2014 के लोकसभा चुनाव में यहाँ से राजनाथ सिंह ने चुनाव लड़ा और एक आसान जीत हासिल की. कुछ यही हाल 2019 में भी हुआ. 2019 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह ने पूनम सिन्हा को 3,47,302 वोटों से हराया.

2024 चुनाव के समीकरण:

इस बार के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. उत्तर प्रदेश में विपक्षी इंडिया गठबंधन की बड़ी पार्टी सपा ने रविदास मेहरोत्रा को उम्मीदवार बनाया है. लखनऊ मध्य से विधायक रविदास मेहरोत्रा की लखनऊ शहर में ख़ासी लोकप्रियता है. सपा ने यहाँ उम्मीदवार घोषित तो कर दिया है लेकिन सपा के साथ एक मुश्किल ये है कि अब तक इंडिया गठबंधन की प्रमुख पार्टी कांग्रेस ने सपा के इस निर्णय पर सहमति नहीं जताई है.

बात अगर भाजपा की करें तो अब तक पार्टी ने यहाँ से उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. इसके अलावा बसपा भी अब तक किसी तरह की राजनीतिक गतिविधि लखनऊ में करती नहीं दिखी है.

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