अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार, 12 जनवरी 2026 को एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर बेहद आक्रामक बयान दिया है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका “किसी भी कीमत पर” ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करेगा। उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड नहीं लिया तो रूस या चीन वहां अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं, जो अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होगा।
ट्रंप ने कहा, “अगर हमने ग्रीनलैंड नहीं लिया तो रूस या चीन इसे ले लेंगे और मैं ऐसा होने नहीं दूंगा। चाहे इस तरह से या किसी और तरह से ग्रीनलैंड हमारा होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस डेनमार्क-शासित स्वायत्त क्षेत्र के साथ किसी समझौते के लिए तैयार है, लेकिन अंतिम नतीजा वही होगा—ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण।
ग्रीनलैंड खनिज संसाधनों से भरपूर और रणनीतिक रूप से बेहद अहम इलाका माना जाता है। आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों का हवाला देते हुए ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी मौजूदगी अब जरूरी हो गई है। हालांकि रूस या चीन ने कभी औपचारिक रूप से ग्रीनलैंड पर दावा नहीं किया है।
ट्रंप के इस बयान से डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगी देशों में चिंता बढ़ गई है। डेनमार्क के प्रधानमंत्री ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका बलपूर्वक ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की कोशिश करता है तो इससे ट्रांस-अटलांटिक सुरक्षा संबंधों को गहरा नुकसान पहुंचेगा।
ग्रीनलैंड 1953 तक डेनमार्क का उपनिवेश रहा था और 1979 में उसे स्वशासन मिला। वहां की अधिकांश आबादी और राजनीतिक दल अमेरिका के अधीन जाने के खिलाफ हैं और कहते हैं कि अपने भविष्य का फैसला ग्रीनलैंड के लोगों को खुद करना चाहिए।
इसके बावजूद ट्रंप लगातार इस दावे पर अड़े हुए हैं कि ग्रीनलैंड को अमेरिका के साथ सौदा करना चाहिए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है, जबकि रूस और चीन के पास युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं। ट्रंप के इस रुख से आने वाले दिनों में अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में और तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।