महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने इस बार कुल 125 सीटें जीतकर यह संकेत दे दिया है कि शहरी राजनीति में उसकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। खास तौर पर छत्रपति संभाजीनगर में 33 सीटों पर मिली जीत को पार्टी के लिए सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। राजनीतिक जानकार इन नतीजों को सिर्फ स्थानीय चुनाव तक सीमित नहीं देख रहे, बल्कि इसे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिहाज से भी अहम मान रहे हैं।
इस सफलता के पीछे पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सक्रिय और आक्रामक चुनावी रणनीति को बड़ी वजह बताया जा रहा है। इस बार ओवैसी ने महाराष्ट्र में ज्यादा समय बिताया, लगातार जनसभाएं कीं और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक सक्रिय किया। पार्टी ने स्थानीय मुद्दों, नागरिक सुविधाओं, रोजगार और बुनियादी समस्याओं को केंद्र में रखकर प्रचार किया, जिससे शहरी मतदाताओं के बीच प्रभाव बना। पार्टी नेताओं का कहना है कि पिछली बार की सीमित सफलता और कुछ करीबी हारों से सबक लेते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत किया गया।
चुनाव नतीजों के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र की जनता का आभार जताते हुए कहा कि पार्टी के पार्षदों की जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है। उन्होंने नवनिर्वाचित पार्षदों से अपील की कि वे अपने-अपने वार्ड में जनता के बीच रहकर विकास कार्यों को प्राथमिकता दें और भरोसे पर खरे उतरें।
आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्रपति संभाजीनगर के अलावा मालेगांव में 21, नांदेड़ में 14, अमरावती में 12, धुले में 10 और सोलापुर में आठ सीटें एआईएमआईएम ने जीती हैं। मुंबई में पार्टी को आठ, नागपुर में छह और ठाणे में पांच सीटें मिलीं। पार्टी का दावा है कि पिछले नगर निकाय चुनावों में मिली सीमित सफलता ने उन्हें शहरी मतदाताओं की सोच समझने में मदद की, जिसका फायदा इस बार साफ तौर पर नतीजों में दिखा।