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एक ही दिन में भा’जपा के दो खिला’ड़ियों ने पाला बद’ला

कौन किस वि’चार पर कितना पक्का है ये प’ता करना शायद मुश्कि’ल हो लेकिन कोई अगर ने’ता है तो ये पता करना आसान है. और ये तब ठीक से पता चल सकता है जब चु’नाव एकदम नज़दीक हों. चुना’व के क़रीब आते ही पा’र्टियों में उथलपुथल मचती है. पुरा’ने धुरंधर छो’ड़ कर चले जाते हैं तो नए आ जाते हैं. ये सभी पार्टि’यों के साथ होता है, हालाँकि पिछले चुना’व में ये कांग्रे’स के साथ अधिक देखने को मिला था, इस बार ये भाज’पा के साथ कुछ अधिक देखने को मिल रहा है.

बड़े मुस्लि’म नेता ने बस’पा में की एंट्री, कर्णाटक में निभाई थी अहम् भूमिका

Satish Mishra- Danish Ali

कर्णाटक में जेडी’एस के बड़े ने’ता माने जाने वाले दानिश अली अपनी पार्टी छोड़ कर बस’पा में आ गए हैं. दानिश का नाम तब सुर्ख़ियों में आया था जब कर्नाटक में जेडी’एस और कांग्रे’स के गठ’बंधन की बात चली थी. दानिश ने बस’पा ज्वाइ’न करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में जेडी’एस का बड़ा आर्गेनाईजेशनल स्ट्रक्चर नहीं है. उन्होंने कहा कि मेरी पूरी मेहनत के बावजूद भी मैं अपनी जन्मभूमि को अपनी कर्मभूमि नहीं बना सकता था..वो आगे कह्ते हैं कि जिस प्रकार का ख़त’रा आज संविधा’न के ऊपर है, ये ज़रूरी हो गया है कि हम अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल मज़बूत ने’तृत्व के साथ करें.

आपको बता दें कि दानिश को जेडी’एस का विशेष रणनीतिकार माना जाता है. वो पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के क़रीबी हैं. उन्होंने कहा कि मैं जब जेडीएस में भी था तब भी मैंने अपने लिए कुछ नहीं माँगा.. ये देवेगौड़ा जी के ऊपर था कि वो मुझे क्या ज़िम्मेदारी देते. उन्होंने कहा कि मैं यहाँ उन्हीं के आशीर्वाद से आया हूँ. उन्होंने कहा,”मैं यहाँ देवेगौड़ा जी की इजाज़त और आशीर्वाद के साथ आया हूँ”. दानिश ने कहा कि जो भी काम मुझे बहन जी (माया’वती) सौंपेंगी, मैं उसे ज़िम्मेदारी से करूँगा.

दानिश के बारे में हम आपको बताएं कि वो कर्णाटक की स’त्ताधारी पा’र्टी जेडी’एस में अहम् मुक़ाम रखते थे. जेडी’एस और कां’ग्रेस के गठ’बंधन में सबसे बड़ी भूमिका दानिश ने ही निभाई थी. उन्होंने जल्दी-जल्दी से कां’ग्रेस ने’ताओं से बातचीत शुरू की थी. चु’नाव होने के बाद और नतीजों से पहले ही दानिश ने कांग्रे’स से ग’ठबंधन की बात शुरू कर दी थी. दानिश के बारे में कहा जाता है कि वो ग’ठबंधन राजनी’ति की बेहतर समझ रखते हैं और उन्हें बस’पा में शामिल करके बस’पा को बड़े फ़ायदे हो सकते हैं. उल्लेखनीय है कि सपा-बसपा यहाँ गठ’बंधन में हैं. इस गठ’बंधन में स’पा-बस’पा के अलावा रालो’द भी है. लो’क’सभा चुनाव में उत्तर प्रदेश का बड़ा महत्व माना जाता है.

सं’घ ने माना इस बार स्थिति अनुकूल नहीं, और मेहनत करनी होगी

Narendra Modi

सन 20-14 में जो माहौल था इस समय वो माहौल नहीं लग रहा. किसी भी एक द.ल.के बारे में ये नहीं कहा जा सकता कि उसकी स्थिति अच्छी है. ऐसे में सभी द.ल. पूरा जोर लगाने में लगे हैं. द.ल. के अलावा वो जो इन द.लों के साथी हैं वो भी मेहनत करने में लगे हैं. आर.एसएस के बारे में सभी जानते हैं कि ये भा-जपा से कैसे जुड़ा हुआ है. परन्तु इस बार इसे भी लगता है कि स्थिति उतनी अनुकूल नहीं है जितनी 20-14 में थी. भा-जपा की वैचारिक इकाई माने जाने वाला आर-एसएस के एक ने’ता ने कहा कि इस बार अधिक मेहनत करने की ज़रुरत है.

आर.-एसएस के एक बड़े ने’ता भैया जी ने कहा कि इस बार परिस्थितियाँ वैसी नहीं है जैसी 2014 में थीं. उन्होंने कहा कि इस बार अधिक ज़ोर लगाने की ज़रूरत है. भा-जपा का नाम लिए बिना ही इस बार आर-एसएस प्रचार करेगा. वो कहते हैं कि जन’ता को पता है कि देशहित में क्या करना है. आर-एसएस के एक ने’ता ने कहा कि चुना=व के हर चर’ण में आर-एसएस के लोग लोगों से संपर्क करेंगे और उन्हें चुना’वी दायित्व के बारे में समझायेंगे. उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि हमारी विचारधारा किस पार्टी के नज़दीक है.

आर-एसएस ने’ताओं के बयान से ज़ाहिर है कि इस बार चु-नाव बहुत दिलचस्प होने वाले हैं. सभी लोग अपनी-अपनी ओर से कड़ी मेहनत कर रहे हैं. माना जा रहा है कि भा-जपा का कांग्रे’स से सीधा मुक़ा’बला है. आपको बता दें कि इस बार भा-जपा ने’ता भी मान रहे हैं कि ये चुना’व उनके लिए आसान नहीं है और कई राज्यों में बने ग’ठबं’धन ने भा’जपा के लिए मुश्किल की स्थिति खड़ी कर दी है. भा-जपा इसी वजह से कुछ ज़्यादा मेहनत करने की बात कर रही है.

अलका लाम्बा ने दिया चौं’काने वाला बयान, कांग्रे स ने किया स्वागत

Alka Lamba- PC Chacko

लोक-सभा चुना’व के नज़दीक होने के साथ नेताओं का अपनी पार्टी छोड़ कर किसी और द’ल में जाने का सिलसिला चल रहा है. कई बड़े ने’ताओं को अगर अपनी पार्टी में टिकट नहीं मिलता तो वो ऐसी पार्टी में चले जाते हैं जिसमें उन्हें टिक’ट मिल जाता है.चाहे वो कोई भी दल हो, इन सब बातों से कोई अछूता नहीं है. चुनाव की च’र्चा इस समय चल ही रही है लेकिन इस बीच आम आदमी पार्टी की वि’धायक अलका लम्बा ने ऐसा बयान दे दिया है जो उनकी पार्टी के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता.

क़द्दावर नेत्री ने आज कहा कि उन्होंने कांग्रे स पार्टी को बीस साल दिए हैं और अगर कोई प्रस्ताव कां-ग्रेस की ओर से आता है तो वो कांग्रे स में जाने के बारे में सोच सकती हैं. लंबा पहले कांग्रेस में ही थीं लेकिन जब आम आदमी पार्टी की स्थापना हुई तो वो उस पार्टी में चली गईं. वो NSUI जोकि कांग्रे’स का छात्र-संगठन है, उसकी अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. उन्होंने कहा कि फ़िलहाल इस तरह का कोई प्रस्ताव कां ग्रेस की ओर से मुझे प्राप्त नहीं हुआ है लेकिन ये मेरे लिए ख़ुशी की बात होगी अगर ऐसा प्रस्ताव आता है.

उन्होंने आगे कहा कि बिन बुलाया मेहमान कहीं भी वेलकम नहीं होता है. उनके इस बयान पर कां’ग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया आ गई है. वरिष्ठ कां’ग्रेसी नेता पीसी चाको ने इस बारे में कहा कि हम हमेशा उनका स्वागत करेंगे. उन्होंने कहा कि वो NSUI की अध्यक्ष रह चुकी हैं. कई नेता ऐसे हैं जो अलग-अलग मौक़ों पर पार्टी छोड़ कर चले गए हैं लेकिन जब वो वापिस आये तो हमने उनका स्वागत किया है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी से गठबंधन के सवाल पर भी चाको ने अपना पक्ष रखा.

चाको ने कहा कि मैंने पहले ही इस बात को कहा है कि दिल्ली में हमें आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहिए. वो कहते हैं कि भाज’पा को ह’राने का सबसे अच्छा तरीक़ा ये है कि हम ‘आप’ से गठबंधन कर लें, मैं और कई और लोग इसी विचार के हैं. उन्होंने कहा कि लेकिन फ़ैसला कां’ग्रेस अध्यक्ष को लेना है और पार्टी अध्यक्ष जो भी फ़ैसला लेंगे पार्टी उसी पर चलेगी. उल्लेखनीय है कि लम्बे समय से कांग्रे स और ‘आप’ के गठबंधन की बात चल रही है, इस बारे में कभी ख़बर आती है कि ये होगा तो कभी आती है कि नहीं होगा.

इतने लाख करोड़ दिए दा’न, अज़ीम प्रेमजी को लोगों ने कहा ‘रोबि’नहु’ड’

Azim Prem Ji

हम अक्सर इस तरह की ख़बरें सुनते हैं कि किसी ने कुछ लाख या कुछ करोड़ रुपए दा’न कर दिए. हालाँकि जिसके पास जितना है वो उसके हिसाब से ही दा’न दे सकता है लेकिन ये देखा गया है कि लोग दा’न कम देते हैं लेकिन उस बारे में कहते बार बार हैं. जिसके पास दौलत होती है वो ख़ूब ख़र्चीली ज़िन्दगी जीता है लेकिन कुछ ऐसे उद्योगपति हमारे देश में अभी भी हैं जो साधारण ज़िन्दगी बिताते हैं और लोगों की मदद में हमेशा आगे रहते हैं. इसी तरह के एक उद्योगपति का नाम है अज़ीम हसन प्रेमजी. प्रेमजी विप्रो कम्पनी के सी’ईओ हैं और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक माने जाते हैं.

प्रेमजी अक्सर दा’न पु’ण्य में आगे रहते हैं. भारत के दूसरे सबसे अमीर इंसान माने जाने वाले प्रेमजी के बारे में अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन ने एक बयान जारी किया है. उन्होंने लोगों की आर्थिक मदद के लिए 52, 750 करोड़ रुपए दिए हैं. इस बारे में फाउंडेशन ने कहा कि उन्होंने ये इसलिए किया है कि अच्छे कामों के लिए आर्थिक सहायता मिले. इस क़दम से प्रेमजी फाउंडेशन जो कुल मदद कर चुकी है वो 21 बिलियन अमरीकी डॉलर है जिसका अर्थ हुआ कि 1.45 लाख करोड़ रुपए प्रेमजी ने दान दे दिए हैं.

इस बयान में ये भी कहा गया है कि आने वाले सालों में ये और बढ़ेगा. जिस तरह से अज़ीम प्रेमजी देश ओ दुनिया के भले के लिए काम कर रहे हैं उनकी तारीफ़ें हर जगह हो रही हैं. उनके बारे में कहा जा रहा है कि वो कॉर्पोरेट रोबिनहुड हैं. प्रेमजी उन चंद उद्योगपतियों में से एक माने जाते हैं जो साधारण ज़िन्दगी जीते हैं. वो एक ऐसे व्यक्ति हैं जो आज भी इकॉनमी क्लास में सफ़र करना पसंद करते हैं. प्रेमजी की इस मदद से उम्मीद की जा रही है कि अज़ीम प्रेमजी विश्विद्यालय जोकि बेंगलुरु में स्थित है उसमें अब 5000 छात्रों का दाख़िला हो सकेगा और 400 फैकल्टी मेम्बेर्स इसमें आएँगे. एक प्रकार से देखें तो ये समाज में रोज़गार भी पैदा कर रहा है और इससे एक अच्छी बात भी समाज के लिए हो रही है.सोश’ल मीडि’या पर उनकी तारीफ़ में कई लोगों ने ट्वीट किया है. उनके अलावा रतन टाटा की भी तारीफ़ लोगों ने की है.

पप्पू यादव की पत्नी ने कहा-‘पप्पू यादव गठबंधन में शामिल हो सकते हैं’

रणजीत रंजन (फ़ोटो को ANI ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है)

बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया सभी दलों में चल रही है. बिहार में इस बार दो गठबंधन का सीधा सामना होगा. महागठबंधन में राजद, कांग्रेस और कई अन्य दल हैं जबकि दूसरा गठबंधन भाजपा, जदयू और लोजेपा का है. बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर इस बार टक्कर अच्छी होने की उम्मीद है. दोनों ही गठबंधन अपने अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं वहीँ महागठबंधन ने घोषणा कर दी है कि आने वाली 17 तारीख़ को वो उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करेगी.

इस बारे में कांग्रेस नेत्री रणजीत रंजन ने पटना में कहा कि बिहार-महागठबंधन 17 मार्च को उम्मीदवारों की लिस्ट की घोषणा करेगा. उन्होंने इसके साथ ही एक चौंकाने वाला बयान भी दिया. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि पप्पू यादव भी गठबंधन के साथ आ जाएँगे. जैसा कि हमने पहले ही बताया कि बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं. बिहार में 7 चरण में मतदान होगा. 11 अप्रैल, 18 अप्रैल, 23 अप्रैल, 29 अप्रैल, 6 मई, 12 मई, और 10 मई को बिहार में लोकसभा सीटों के लिए मतदान होगा. पप्पू यादव जन अधिकार पार्टी के नेता हैं और उन्हें बा’हुब’ली सांसद की श्रेणी में शामिल किया जाता रहा है.

आपको बता दें कि रणजीत रंजन लोकसभा सांसद पप्पू यादव की पत्नी हैं. यादव जन अधिकार पार्टी में हैं वहीँ उनकी पत्नी रंजन कांग्रेस पार्टी की नेत्री हैं. रंजन सुपौल से सांसद हैं जबकि पप्पू यादव मधेपुरा से लोकसभा में पहुँचे थे. राजद के चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरे पप्पू यादव ने पिछले लोकसभा चुनाव में क़द्दावर समाजवादी नेता शरद यादव को हराया था. हालाँकि उसके बाद से कई समीकरण बदले हैं. पप्पू यादव ने 2015 में अपनी पार्टी बना ली और शरद यादव भी जदयू से अलग हो गए.

शरद यादव ने अपनी नई पार्टी बनायी है जिसका नाम लोकतान्त्रिक जनता दल है. इस पार्टी के बनने के साथ ही ये महागठबंधन में शामिल हो गई. बिहार में चुनावी बयार किस ओर जाती है ये तो अभी वक़्त ही तय कर सकता है. हालाँकि इसमें कोई दो राय नहीं कि लोकतंत्र के इस पर्व में जनता अपनी पसंद के नेता को सत्ता के शिखर तक पहुँचाने के लिए ज़रूर तैयार होगी लेकिन जनता का नेता कौन है ये तो आने वाला समय ही तय करने वाला है.

इस तरह से आपकी ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ ला सकता है फूल..

Flower

“फूल तुम्हें भेजा है ख़त में, फूल नहीं ये मेरा दिल है” गाने के बोल से समझें तो फूल की एहमियत क्या है हम समझ सकते हैं. प्रेमी अपनी प्रेमिका से कह रहा है कि ये फूल जो भेजा है वो उसका दिल है. फूल का दुनिया में क्या महत्व है ये इसी बात से पता चल जाता है. फूल आख़िर इतना महत्व क्यूँ रखता है और हमें इतना अज़ीज़ क्यूँ लगता है. आइये इसके बारे में जानने की कोशिश करते हैं. फूल के बारे में वैज्ञानिकों का ये दावा है कि पहला फूल इस ज़मीन पर कोई बीस करोड़ साल पहले आया होगा.

इस समय फूलों की साढ़े तीन लाख से भी ज़्यादा क़िस्में हैं. कहा जाता है कि कुछ और भी क़िस्में हो सकती हैं जोकि अभी तक इंसान की पहुँच तक नहीं आयी हैं. फूल को अंग्रेज़ी में “flower” और संस्कृत में “पुष्प” कहते हैं. फूल असल में पौधे का वो हिस्सा होता है जो अक्सर चमकदार और रंगीन नज़र आता है. फूल की एहमियत आज के दौर में हर एक प्रोग्राम में समझी जा सकती है. किसी की शादी होती है तो फूलों से सजावट की जाती है. भारत में जितने भी शुभ कार्य होते हैं उसमें फूलों का विशेष महत्व है. पूजा में भी फूलों का इस्तेमाल होता है.

हम सभी जानते हैं कि आधुनिक दौर में जबकि लोग मशीनों पर निर्भर से हो गए हैं तब भी फूलों की अपनी ही एहमियत है. किसी को प्यार जताना है तो वो ताज़ा फूल लेकर अपने प्रेमी या अपनी प्रेमिका के पास जाता है. महँगे-महँगे तोहफ़े एक तरफ़ और एक प्यारा फूल एक तरफ़, नाराज़ प्रेमी हो प्रेमिका हाथ में फूल आते ही हल्की मुस्कान आ जाती है. कुछ इस तरह की ताक़त है फूल में. किसी साधारण सी बात को अच्छा बनाने के लिए बस एक फूल की आव्यश्यकता होती है.

पश्चिमी देशों में फूलों का इस्तेमाल किसी को मनाने के लिए, प्यार जताने के लिए और संवेदना प्रकट करने के लिए होता है. भारत में भी मंदिरों और मज़ारों में फूलों का विशेष महत्व देखने को मिलता है. फूलों के बारे में ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि ये बहुत ही शुभ और पवित्र होते हैं. ज्योतिष-विशेषग्यों की मानें तो आपकी हर एक कामना फूलों के इस्तेमाल से पूरी हो सकती है. फूलों का घर में होना सकारात्मकता का संकेत है और फूलों के होने से नकारात्मक ऊर्जा घर में नहीं आ पाती. शायद यही वजह है कि घर के आसपास फुलवारी की एक परम्परा है जो कई सदियों से चली आ रही है.

बात अगर वास्तुशास्त्र की करें तो भी फूलों के महत्व को समझा जा सकता है. वास्तुशास्त्र के मुताबिक़ घर में फूलों का होना ज़रूरी है. फूलों में ख़ुशबू होती है और इनमें जो विशेष क़िस्म की सुन्दरता होती है वो घर में रौनक लाती है. वास्तु की मानें तो घर के आगे चाँदनी, मीठा नीम, मोगरा, रातरानी, जूही, चमेली, वैजयंती आदि फूलों के होने से सुगन्धित माहौल होता है और किसी प्रकार का वास्तु दोष यदि होता है तो वो दूर होता रहता है. फूलों से ख़ुशहाली का वातावरण बनता है और घर में संतुष्टि की बात रहती है. कुल मिलकर फूलों का होना घर में बड़ा ही प्यारा और अच्छा है.

तुर्की में खुला यूरोप का सबसे बड़ा अस्पताल, एरदोगन ने किया उदघाटन

रजब तैयब एरदोगन

1990 के दशक में तुर्की एक ऐसा देश था जो कई तरह की समस्याओं से जूझ रहा था लेकिन उसके बाद देश ने जो विकास की राह पकड़ी है वो क़ाबिल ए तारीफ़ है. राष्ट्रपति रजब तैयब एरदोअन को न-पसंद करने वाले भी इस बात को मानते हैं कि उन्होंने देश में कई विकास के काम किये हैं. उनके द्वारा स्वास्थ संबंधी सेवाओं पर जो काम किया गया है उसकी चर्चा यूरोप समेत पूरी दुनिया में हो रही है. एरदोगन एक ऐसे नेता हैं जो पिछले दिनों और बड़े होकर उभरे हैं.

एरदोगन की दुनिया भर में तो साख बेहतर हो ही रही है वहीं तुर्की में उन्होंने विकास कार्य में कोई ढिलाई नहीं बरती है. अब जो ख़बर हम बताने जा रहे हैं वो तुर्की के अखबारों की सुर्ख़ियों में है. तुर्की इस समय स्वास्थ सेवाओं पर जिस तरह से ध्यान दे रहा है दुनिया भी उसे देख रही है. जुमेरात के रोज़ तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एरदोअन ने देश की राजधानी अंकारा के बिल्केंत ज़िले में यूरोप के सबसे बड़े अस्पताल का उदघाटन किया. एरदोगन ने शहरों में बनने वाले अस्पतालों को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट कहा है.

एरदोगन का मानना है कि अगर बेहतर स्वास्थ सुविधाएं होंगी तो लोगों के लिए ये बड़ी राहत की बात होगी. उन्होंने इस मौक़े पर कहा कि हमें एक ऐसी सभ्यता मिली है जो स्वास्थ को सबसे बड़ी ख़ुशी मानती है..इस समझ से जब हम सत्ता में आये तो हमारी प्राथमिकता थी कि हम स्वास्थ सेवाओं को बेहतर करें. ये बातें एरदोगन ने ओपनिंग सेरेमनी में कहीं. उन्होंने साथ ही कहा कि पहले अस्पताल बुरी कंडीशन में थे, हमारे नागरिकों को परेशानियां आती थीं और बीमारियाँ बढ़ती ही जा रही थीं. 2017 से लेकर ये नौवां अस्पताल है जो सरकार ने शहरों में खोला है. हम देख रहे हैं कि दुनिया भर में स्वास्थ सेवाओं को लेकर काम करने की बात हो रही है लेकिन बहुत कम देश ही इस ओर ठीक से काम कर पा रहे हैं, उनमें से एक तुर्की है.

सऊदी अरब जाना हुआ आसान, शुरू हुई ये नई सर्विस

Saudi Arabia Jeddah

सऊदी अरब: हाल ही मे सऊदी अरब के प्रिंस क्राउन सलमान बिन अज़ीज़ भारत के दौरे पर आये थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे।इसे भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ती हुई रणनीतिक साझेदारी के तौर पर देखा गया था। उसके बाद से यह कयास लगाये जा रहे थे कि सऊदी अरब अपनी वीज़ा संबंधी नीतियों मे कुछ लचीलापन ला सकता है।

मायावती ने लगाया सभी अटकलों पर विराम, कांग्रेस से गठबंधन को लेकर कही बड़ी बात.

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Mayawati

उत्तर प्रदेश:आगामी लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान होने के बाद अब किसी भी दल के पास ज़्यादा विकल्प बचे नहीं हैं। अब सभी को अपने उम्मीदवारों का ऐलान करके जनता के बीच जाना है। ऐसा माना जा रहा है कि जिन दलों के बीच गठबंधन होने थे ,हो चुके। अब शायद हो कोई उठा पठक की ख़बर कहीं से आये। इस कड़ी में बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने आज एक बार फिर साफ कर दिया कि उनकी पार्टी किसी भी राज्य में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी।