चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में सिर्फ़ असम ही एक ऐसा राज्य है जहाँ भाजपा को उम्मीद के मुताबिक़ नतीजे मिले. भाजपा की बंगाल में हुई हार उसके लिए कई सवाल देकर चली गई है. चुनाव के दौरान जिस तरह से भाजपा नेता दावा कर रहे थे कि उनकी पार्टी 200 सीटें जीत रही है, नतीजों में जब पार्टी 100 का आँकड़ा भी नहीं छू पायी तो भाजपा नेता मीडिया से भी बचने लगे. जहाँ बंगाल की हार ने पार्टी को परेशान किया था वहीं असम की जीत ने पार्टी को अंदरूनी तांक-झाँक करने पर मजबूर कर दिया.

यूँ तो भाजपा में कई दूसरी पार्टी के नेता शामिल हुए हैं, पिछले कुछ सालों में कांग्रेस के कई क़द्दावर नेता भाजपा के साथ आये हैं लेकिन अधिकतर जानकार मानते हैं कि पार्टी ने हमेशा अपने पुराने सदस्यों को ही प्राथमिकता दी है. हालाँकि इस बार भाजपा ने असम में अपना हिसाब-किताब बदला है और पूर्व के कांग्रेसी और अब भाजपा की नैया पार कराने वाले हेमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला किया है.


असम के राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पार्टी के लिए राज्य में एक अजीब सी मुश्किल खड़ी हो गई थी. सर्बानंद सोनोवाल फिर से मुख्यमंत्री बनना चाह रहे थे लेकिन पार्टी की राज्य इकाई हेमंत बिस्वा सरमा के साथ थी. भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व भी इस समय कई वजहों से दबाव में है. कोरोना की दूसरी लहर ने मोदी सरकार के उन दावों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं जिनमें कहा गया था कि कोरोना देश में ख़त्म हो गया. भाजपा इस वजह से नहीं चाहती थी कि किसी तरह की कोई और मुश्किल खड़ी हो.

यही वजह है कि भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने हेमंत के नाम पर मुहर लगा दी. कई दिनों तक मंथन के बाद अब हेमंत बिस्वा सरमा के असम के अगले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। उन्हें असम बीजेपी के विधायक दल ने अपना नेता चुन लिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इसकी जानकारी दी। इससे पहले निवर्तमान मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रविवार को ही राज्यपाल जगदीश मुखी को अपना इस्तीफा सौंपा था।

बता दें कि दिल्ली में हुई बैठक के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि असम की कमान हेमंत बिस्वा सरमा को सौंपी जा सकती है तो वहीं सोनोवाल को वापस दिल्ली बुलाया जा सकता है। असम में 126 विधानसभा सीटें हैं, भाजपा गठबंधन ने 75 सीटों पर जीत पायी है.

By Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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