नई दिल्ली: दिल्ली में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ शाहीन बाग़ में चल रहे ध’रने को लेकर सरकार चिं’ता में है. सरकार चिं’ता में तो है लेकिन सरकार का कोई नु’माइंदा आगे बढ़कर शाहीन बाग़ के लोगों से बात नहीं करना चाहता. यही वजह है कि मामला फँसा हुआ है. अब इस ध’रने को लेकर कहा जा रहा है कि इससे रा’स्ता जाम हो रहा है. इसी को लेकर मा’मले की सुन’वाई सु’प्रीम को’र्ट में हुई. देश की सर्वोच्च अ’दालत ने इस बारे में कहा कि हम ध’रने पर कुछ नहीं कह रहे हैं लेकिन सवा’ल ये है कि यह ध’रना कहां हो रहा है.

अदालत ने आगे कहा कि हमारी चिं’ता इस बात पर है कि यह प्र’दर्शन सड़क पर किया जा रहा है, इस केस या फिर किसी भी केस में स’ड़क को ब्लॉक नहीं किया जा सकता है. इसके जवाब में शाहीन बा’ग़ प’क्ष के वकील ने कहा कि हमें इसके लिए थोड़ा समय चाहिए. इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर दूसरे मामले में भी रोड ब्लॉक करके इस तरह का प्रद’र्शन करते हैं तो अ’फ़रातफ़री म’च जाएगी.

इस मामले में एक याचिका दायर हुई है जिसकी ओर से उसने अदा’लत को बताया कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने ध’रना प्र’दर्शन को लेकर गाइडलाइन बनाई थी, लेकिन यहां यहां सडक को बं’द कर रखा है.सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह रोड को बं’द करके प्रद’र्शन करने का आइडिया किसी को भी आएगा, बे’हतर होगा कि प्रदर्श’न को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाए. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर बातचीत के लिए संजय हेगड़े और साधना रा’मचंद्रन नियुक्त किया है. माम’ले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

शाहीन बाग के याचि’काकर्ता नंद किशोर गर्ग ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा,”मैं चाहता था कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट फैसला दे. बहुत दे’र हो गई है. वि’वाद का एक सम्मा’नीय रास्ता निकलना चाहिए. संजय हेगड़े एक वरिष्ठ वकील हैं, अगर वे चाहें तो ये वि’वाद 2-3 दिन में सुलझ सकता है. प्रद’र्शन के लिए वैक’ल्पिक जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी और जंतर-मंतर है.”

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