सपा के इतिहास में कभी भी नहीं हुआ ऐसा, इस बार के UP चुनाव में…

समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। 2022 विधानसभा चुनाव में सपा ने पिछले विधानसभा चुनाव से बेहतर प्रदर्शन करके 111 सीटें दर्ज कीं, वहीं इसके सहयोगी दलों ने भी 14 सीटें जीतीं। इस पार्टी के चुनावी इतिहास को जानने की कोशिश करते हैं।

जनता दल से अलग होकर 4 अक्टूबर 1992 को मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी की स्थापना की। लंबे समय तक सपा को किसानों की पार्टी भी कहा जाता था और इसके नेता मुलायम सिंह यादव को ‘धरती पुत्र’ कहकर पुकारा जाता था।

सपा ने पहली बार 1993 में चुनाव लड़ा। इस चुनाव में सपा और बसपा ने हाथ मिलाया और कहा कि साम्प्रदायिक ताक़तों को ख़त्म करने के लिए उन्होंने ऐसा किया है। सपा इस चुनाव में 256 सीटों पर लड़ी और 109 सीटों पर उसने जीत हासिल की वहीं बसपा 164 पर लड़ी और 67 जीती। इस चुनाव में सपा ने 256 सीटों पर लड़कर 17.94 प्रतिशत वोट हासिल किए। सपा-बसपा गठबंधन ने जनता दल और कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाई और मुलायम सिंह यादव एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। मुलायम इसके पहले 1989 में भी मुख्यमंत्री चुने गए थे तब वो जनता दल के नेता थे।

1993 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उत्तराखंड आंदोलन का मुलायम ने विरोध किया और उत्तर प्रदेश के बँटवारे की माँग को उन्होंने सिरे से नकार दिया। 1995 में उनकी सरकार गिर गई। इसके बाद बसपा नेता मायावती ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई।



उत्तर प्रदेश के 1996 विधानसभा चुनाव में सपा ने जनता दल, भारतीय किसान कामगार पार्टी, और नारायण दत्त तिवारी की तिवारी कांग्रेस से गठबंधन करके चुनाव लड़ा। सपा ने 281 सीटों पर चुनाव लड़ा और इसमें से 110 सीटें सपा ने जीत लीं। सपा को 21.8 प्रतिशत वोट मिला। इस चुनाव में भाजपा को 174 और बसपा को 67 सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस को 33 सीटें। ऐसे में किसी भी दल की सरकार बनना यहाँ चुनौती हो गई थी, लंबी बातचीत के बाद बसपा और भाजपा ने हाथ मिलाया और सरकार बनाई। 1996 से लेकर 2002 तक उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रपति शासन भी देखा और साथ ही चार अलग-अलग मुख्यमंत्री भी देखे। कहा जाता है कि इस पीरियड में भाजपा ने कई बार मुलायम को समर्थन देने की पेशकश की लेकिन मुलायम ने भाजपा का समर्थन लेने से इनकार कर दिया।

2002 विधानसभा चुनाव में सपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। सपा को 403 सीटों वाली विधानसभा में 143 सीटें मिलीं। इस चुनाव में सपा 390 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसका मत प्रतिशत 25.37 था। इस चुनाव में भाजपा तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। बसपा को 98 और भाजपा को 88 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस 25 सीटों पर जीती। चुनाव के बाद भाजपा ने बसपा को समर्थन दे दिया और मायावती एक बार फिर भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि ये सरकार बहुत दिन नहीं चली। इसके बाद मुलायम सिंह ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया और अन्य छोटे दलों के समर्थन को हासिल कर सपा के नेतृत्व में एक बार फिर सरकार बनी।

2007 विधानसभा चुनाव में सपा के ख़िलाफ़ सत्ता-विरोधी लहर चली। सपा को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। सपा को 97 सीटें मिलीं और इसका मत प्रतिशत 25.43 रहा। बसपा को 206 सीटें मिलीं और मायावती पूर्ण बहुमत के साथ राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। इस चुनाव में भाजपा 51 सीटों पर सिमट गई।



2012 विधानसभा चुनाव में सपा ने शानदार वापसी की। सपा ने 401 सीटों पर चुनाव लड़ा और 224 सीटें जीतीं। सपा को 29.15 प्रतिशत वोट मिले। इस चुनाव में बसपा को 80 और भाजपा को 47 सीटें मिलीं। मुलायम सिंह यादव ने चुनाव के बाद अपने बेटे अखिलेश यादव का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए आगे किया और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

2017 विधानसभा चुनाव तक देश में भाजपा ने अपनी पकड़ मज़बूत कर ली थी। 2014 लोकसभा चुनाव की मोदी लहर के बाद हुए चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया। भाजपा ने 312 सीटें जीतीं जबकि सपा को इस चुनाव में महज़ 47 सीटें मिलीं। बसपा को इस चुनाव में महज़ 19 सीटें ही मिलीं। सपा को 21.82 प्रतिशत वोट मिले जबकि वो 311 सीटों पर चुनाव लड़ी। इस चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था।

2022 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा की सीटों का आँकड़ा 47 से 111 सीटों पर पहुँच गया। पार्टी को 32.06 प्रतिशत वोट मिले जबकि सपा ने 343 सीटों पर ही उम्मीदवार उतारे थे, बाक़ी सीटों पर रालोद और सुभासपा ने चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भाजपा गठबंधन को 273 सीटें मिलीं जबकि बसपा को महज़ एक सीट मिली,कांग्रेस को 2 और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक को भी 2 सीटें मिलीं।

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