सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी समूह द्वारा एक तस्वीर लगातार शेयर की जा रही है. इस तस्वीर में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं और उनके पीछे कुछ किताबें रखी हैं. वा’यरल फ़ोटो में पीछे जो किताबें नज़र आ रही हैं उनमें एक किताब का नाम “होली बाइबिल” और एक और का ‘हाउ टु कन्वर्ट इंडिया इनटू क्रिश्चियन नेशन’ लिखा हुआ है.

इसको कई ट्विटर यूजर ने शेयर किया है लेकिन जब इसकी जाँच हुई तो मालूम हुआ कि ये इमेज फ़र्ज़ी है. खोजी वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ ने बताया है कि ट्विटर यूज़र @noconversion ने सबसे पहले इस तस्वीर को शेयर किया. उसके इस आर्टिकल को 700 री-ट्वीट मिल गए. एक और यूज़र @asgarhid के ट्वीट को 400 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया.

तमिलनाडु BJP सचिव सुमति वेंकटेश और BJP समर्थक रेणुका जैन ने भी इस तस्वीर को शेयर किया. हालाँकि जब हंगामा हुआ और उन्हें एहसास हुआ कि उनका झूठ पकड़ा जाएगा तो उन्होंने अपने ट्वीट डिलीट कर दिए. पत्रकार और BJP समर्थक मानी जाने वाली मीना दास नारायण ने भी इस तस्वीर को शेयर किया.

ट्विटर की तरह ये फ़ेसबुक पर भी धड़ल्ले से शेयर हो रही है. फ़ेसबुक पर जिन ग्रुप्स से ये शेयर हुई है उनमें ‘सुदर्शन न्यूज़’ और ‘PMO इंडिया न्यू दिल्ली’ शामिल है. ऐसा माना जा रहा है कि व्हाट्सअप पर भी इसका प्रोपगंडा चल रहा होगा. हालाँकि जब ऑल्ट न्यूज़ नामक साईट ने पड़ताल की तो मालूम हुआ कि अगर कोई ध्यान से देखे तो इस तस्वीर में बायीं तरफ़ एक किताब पर @noconversion लिखा दिखता है जोकि एक ट्विटर हैंडल है.

इससे ऐसा शक हो जाता है कि इस तस्वीर में जैसा दिख रहा है वैसा ही नहीं है. ऑल्ट न्यूज़ लिखता है कि इस तस्वीर का रिवर्स इमेज सर्च हमें कांग्रेस द्वारा अक्टूबर 2020 में पोस्ट किए गए वीडियो तक ले जाता है जहां सोनिया गांधी केंद्र सरकार से किसानों के मुद्दे पर और इंधन के दामों में हुई बढ़ोत्तरी पर सवाल कर रहीं थीं. राहुल गांधी ने भी ये वीडियो ट्वीट किया था.

कांग्रेस पार्टी के अपने कई वीडियो में ये किताबें नज़र आती हैं जिनके नाम वो नहीं हैं जैसा कि वाय’रल इमेज में दावा किया जा रहा है. ऑल्ट न्यूज़ ने अपनी रिसर्च में पाया है कि ‘हाउ टु कन्वर्ट इंडिया इनटू क्रिश्चियन नेशन’ और ‘होली बाइबिल’ किताबें पीछे अलमारी में नहीं दिख रही हैं. इसके साथ ही वहां रखी ईसा मसीह की मूर्ति भी नहीं दिखती है. इसलिए, ये कहा जा सकता है कि वा’यरल हो रही तस्वीर एडिट की गयी है.

By Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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