मुकुल रॉय के बाद भाजपा को लगेगा एक और बड़ा झ’टका?, एक ही झटके में..

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चु’नाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच जमकर सियासी घ’मासान हुआ था। 2 मई को चुनावी नतीजे आने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने पूर्ण बहुमत के साथ बंगाल में अपनी सरकार बनाई। बड़े बड़े दावे करने वाली बीजेपी महज़ 77 सीटों पर ही सि’मट गई जबकि टीएमसी को 213 सीटें मिली।

चुनाव से पहले टीएसमी के कई नेताओं ने बीजेपी का हाथ थाम लिया था। लेकिन जब चुनाव के बाद तीसरी बार बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार बनी तब बीजेपी में शामिल हुए कई नेता और विधायक टीएसमी में वा’पसी की इच्छा जताने लगे। कुछ समय पहले बीजेपी नेता मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने अपने फेसबुक पोस्ट में अपनी ही पार्टी यानी कि बीजेपी को आत्ममंथन करने की न’सीहत दी थी और चुनी हुई सरकार की आ’लोचना बन्द करने को कहा था। तब से ही ऐसी अ’टकलें लगाई जा रही थी कि मुकुल रॉय टीएमसी में वापस जा सकते हैं।

वहीं, अब मुकुल रॉय ने बीजेपी को छोड़ दिया है और वह अब टीएमसी में शामिल हो गए हैं। मुकुल रॉय को लेकर बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष ने शनिवार को नि’शाना साधा। उन्होंने कहा, जो लोग ऐसी पार्टी से आए हैं, जहां “कट मनी” का चलन है उनके लिए बीजेपी में रहना मु’श्किल है। मुकुल रॉय के बीजेपी से जाने से बीजेपी पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा। उन्होंने मुकुल रॉय के लिए कहा कि बीजेपी को आया राम,गया राम’ जैसे लोगों की परवाह नही है।

दिलीप घोष ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “यह जरूरी नहीं है कि जो कोई भी बीजेपी में आएगा वह वहीं रहेगा ही क्योंकि यहां ‘तपस्या’ करने की जरूरत होती है. ऐसे लोगों का बीजेपी में रहना थोड़ा मुश्किल है जो ऐसी पार्टी (टीएमसी) से आए हैं जहां कट मनी और सिंडिकेट कल्चर हो”। दूसरी तरफ मुकुल रॉय के टीएमसी में शामिल होने के बाद बीजेपी से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले और राज्य के पूर्व मंत्री, राजीव बनर्जी ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के राज्य महासचिव कुणाल घोष से मुलाकात की।

बता दें कि, राजीव बनर्जी ने बीते दिनों सोशल मीडिया पर अपनी नई पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा था, ‘‘लोग भारी जनादेश से चुनी गयी सरकार के खिलाफ राष्ट्रपति शासन की धमकी को पसंद नहीं करेंगे”। राजीव बनर्जी को लेकर भी अटकलें तेज़ हैं कि वो भी बीजेपी को छोड़कर टीएमसी में शामिल हो सकते हैं।

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