पटना. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की ज़मानत होने के साथ ही बिहार के सियासी समीकरण बदल रहे हैं. ऐसी ख़बरें तेज़ हो गई हैं कि NDA में शामिल हम प्रमुख जीतन राम मांझी और विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी की लालू यादव से हुई बातचीत ने माहौल को गर्मा दिया है. राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के एनडीए के सहयोगी दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी से टेलिफोन पर हुई 12 मिनट की बातचीत ने बिहार की सियासत में काफी हलचल मचा दी है.

243 सीटों वाली विधानसभा में 127 विधायकों के समर्थन के बूते अल्प बहुमत से सरकार चला रही नीतीश सरकार के लिए यह खतरे का संकेत माना जा रहा है. अंदरखाने की खबर यह भी है कि जीतन राम मांझी को लालू प्रसाद ने बहुत बड़ा ऑफर दे दिया है. दूसरी ओर खबर यह भी है कि लालू प्रसाद यादव ने एनडीए के एक अन्य सहयोगी विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी से भी टेलिफोनिक बात की है.

हालांकि सहनी ये कह रहे हैं कि टूट की ख़बरों में कोई दम नहीं है. हालांकि सहनी ने एनडीए में टूट की खबरों से इनकार किया है, लेकिन इन चर्चाओं में थोड़ी भी सच्चाई है तो मांझी के चार और सहनी के चार विधायक मिलकर एनडीए सरकार के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं. तेजप्रताप ने बीते शुक्रवार को न सिर्फ मांझी से मुलाकात की बल्कि फोन पर अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव से उनकी बात भी कराई.

इस मुलाकात और बातचीत के बारे में मांझी ने कहा था कि ये बिल्कुल गैर राजनीतिक और विशुद्ध पारिवारिक मामला है. राजनीति में मतभेद तो होता है, लेकिन मनभेद नहीं होता. लालू यादव के परिवार से उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंध हैं. इसी तरह मुकेश सहनी ने भी शुक्रवार को आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से फोन पर बात की है.

जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो एक चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि इसे पर्दे में ही रहने दीजिए. बांका की घटना पर उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है. जांच एजेंसी पहले घटना की जांच कर ले फिर हमें उसपर प्रतिक्रिया देनी चाहिए. उन्होंने सीएम नीतीश को भी विधायकों को ऐच्छिक कोष से खर्च करने की अनुमति मांगी है. ऐसे में समझा जा रहा है कि भले ही ऊपर-ऊपर सब ठीक लग रहा है लेकिन बिहार की सियासत में अंदर ही अंदर बड़ी हलचल है.

By Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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