कुछ ही रोज़ पहले हमने देखा था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर चौधरी ने राष्ट्रपति को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी जिसको लेकर बहुत विवाद हो गया। हालाँकि बाद में उन्होंने इसको लेकर खेद जताया और माफ़ी भी माँग ली।

ये मामला अभी शांत ही हुआ था कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी का एक बयान विवादों में आ गया है। राज्यपाल ने एक प्रोग्राम में कहा कि अगर महाराष्ट्र, ख़ासकर मुम्बई और ठाणे से गुजराती और राज्यस्थानी लोगों को निकाल दिया जाए तो राज्य के पास पैसा नहीं बचेगा और मुम्बई आर्थिक राजधानी नहीं रह जायेगा।

राज्यपाल का ये बयान महाराष्ट्र के नेताओं को बिल्कुल पसन्द नहीं आया। शिवसेना के अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल पर “हिंदुओं को बाँटने” का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि ये ‘मराठी मानुष’ और ‘मराठी गौरव’ का अपमान है। ठाकरे ने माफ़ी की माँग करते हुए कहा कि अब जो नए हिन्दू बने हैं, उन सत्ताधारी हिंदुओं से पूछना चाहता हूँ, मैं जानबूझकर ये कह रहा हूँ क्यूँकि उनके मुताबिक़ मैं हिंदुत्व छोड़ चुका हूँ।”

उनका ये निशाना मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके साथियों पर था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी राज्यपाल की टिप्पणी पर असहमत दिखे। उन्होंने कहा कि शहर के विकास में मराठियों के योगदान को कभी नज़र-अंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राज्यपाल एक संवैधानिक पद है, उन्हें अपने बयानों से किसी को भी ठेस पहुँचाने के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह नहीं जानते कि राज्यपाल कोश्यारी के पद का सम्मान करने के लिए कब तक चुप रहना है. उन्होंने कहा, ‘मैं राज्यपाल पद के बारे में कुछ नहीं कह रहा हूं लेकिन उस कुर्सी पर बैठे व्यक्ति को उस कुर्सी का सम्मान करना चाहिए.’

पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘पिछले दो-तीन साल में उनके जो बयान हैं, वो देखकर ऐसा लगता है कि महाराष्ट्र के नसीब में ही ऐसे लोग क्यों आते हैं? बतौर मुख्यमंत्री मैं जब कोविड-19 के मामले बढ़ रहे थे, लोग मर रहे थे, मैं उस पर काम कर रहा था और इन्हें मंदिर खोलने की जल्दबाजी थी. बाद में सावित्रीबाई फुले का अपमान किया. आज महाराष्ट्र में ही मराठी मानुस का अपमान किया गया.

उन्होंने कहा कि मराठी मानुस नाराज हैं. 105 लोगों ने बलिदान देकर मुम्बई को महाराष्ट्र में रखा है. लोगों ने ख़ून बहाकर मुंबई पाया है. आज मराठी मानुस का मुद्दा उठाकर उन्होंने लोगों में ग़ुस्सा लाया है. राज्यपाल राष्ट्रपति के दूत हैं, राष्ट्रपति की बातों को देशभर में यह लेकर जाते हैं. लेकिन अगर यहीं ग़लती करें तो इन पर कौन कार्रवाई करेगा? इन्होंने मराठी मानुस और मराठी अस्मिता का अपमान किया है. उद्धव ठाकरे ने कहा इन्होंने साथ ही हिंदुओं में फूट डालने का काम किया है. एक दूसरे को आपस में लड़ाने का काम कर रहे हैं.

देश भर के लोगों के इसे अपना घर बनाने के बावजूद, मराठी लोगों ने अपनी पहचान और गौरव को बरकरार रखा है और इसका अपमान नहीं किया जाना चाहिए. मुंबई को महाराष्ट्र की राजधानी बनाने के आंदोलन में 105 लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी और शिवसेना के दिवंगत संस्थापक बाल ठाकरे ने शहर की मराठी पहचान को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

इस मामले के आने के बाद से शिवसेना आक्रामक हो गई है और दूसरी ओर शिंदे कैम्प डिफेंसिव दिख रहा है। वहीं भाजपा ने पूरे मामले पर चुप्पी सी साधी हुई है।

By Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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