कहते हैं दूध का जला छाछ भी फूँक फूँक कर पीता है. कुछ यही स्थिति है आज विपक्षी दलों की. केंद्र की सत्ता पर क़ाबिज़ भाजपा पर विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि जिस राज्य में भी विपक्षी पार्टी की सरकार है वहाँ भाजपा साम-दाम-दंड-भेद किसी भी तरह से सरकार गिराने की कोशिश करती है. इसको लेकर विपक्ष गोवा, कर्णाटक, मध्य प्रदेश, और महाराष्ट्र का उदाहरण देते हैं.

महाराष्ट्र में चले सियासी ड्रामे के बाद शिवसेना में भारी टूट हुई और कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन वाली उद्धव ठाकरे सरकार गिर गई. इसके बाद महाराष्ट्र में भाजपा ने एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर सरकार बनाई. शिंदे को मुख्यमंत्री और देवेन्द्र फडनवीस को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया. एकनाथ शिंदे की सरकार बने एक महीना हो चुका है लेकिन अभी तक कैबिनेट में सिर्फ़ दो लोग हैं, एक तो ख़ुद शिंदे और एक हैं फडनवीस. शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस इसको लेकर मज़े भी ले रहे हैं कि अगर कैबिनेट मंत्री ही नहीं चुन पा रहे हैं तो आख़िर मंत्रालय का कामकाज कब शुरू होगा.

महाराष्ट्र में सियासी बयानबाज़ी भले ही तेज़ हो लेकिन मामला काफ़ी हद तक शांत है. महाराष्ट्र में भाजपा सरकार बन गई है तो अब झारखण्ड से ख़बर आ रही है कि भाजपा झारखण्ड में भी सरकार गिराने की जुगत लगा रही है. झारखण्ड में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन की सरकार है जबकि भाजपा मुख्य विपक्ष है. पिछले कई दिनों से तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियाँ दावा कर रही थीं कि महाराष्ट्र के बाद भाजपा की नज़र झारखण्ड और पश्चिम बंगाल पर है.

ताज़ा ख़बर ये है कि झारखंड से कांग्रेस के तीन विधायकों को शनिवार रात पुलिस ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा ज़िले में रोक लिया. इसके बाद जब पुलिस ने तलाशी ली तो भारी मात्रा में उनकी गाड़ी से रुपया बरामद हुआ. इस कैश के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया. झारखण्ड कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा कि ये पैसा हेमंत सोरेन की सरकार को गिराने के लिए भाजपा साज़िश का हिस्सा है.

कांग्रेस ने दावा किया कि उनके विधायकों को ख़रीदने के लिए ये पैसा दिया गया. झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु टिर्की ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि यह बीजेपी की साज़िश है. हेमंत सोरेन सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही बीजेपी उसे अस्थिर करने का प्रयास कर रही है. अगर हम देखें कि महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों में क्या हुआ तो यह साफ हो जाएगा कि बीजेपी सरकारों को सत्ता से बाहर करने के लिए धन का प्रयोग करती है.”

उन्होंने कहा,”मैं पार्टी आलाकमान से इन तीन विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूं, ताकि पार्टी के अन्य सदस्यों को कड़ा संदेश दिया जा सके.” पार्टी ने तीनों विधायकों को सस्पेंड कर दिया है. पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय संचार प्रभारी जयराम रमेश ने ट्वीट किया, “झारखंड में बीजेपी का ‘ऑपरेशन लोटस’ हावड़ा में बेनकाब हो गया.” उन्होंने लिखा, ” दिल्ली में ‘हम दो’ का गेम प्लान झारखंड में वही करना है जो उन्होंने महाराष्ट्र में ई-डी (एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस) जोड़ी लगाकर किया.”

वहीं, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने दावा किया कि ये बीजेपी की सरकार को अस्थिर करने की साज़िश है. कांग्रेस नेता ने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का उल्लेख किया, जो पिछले महीने उद्धव ठाकरे सरकार के पतन के साथ समाप्त हुआ था, जब शिवसेना के विधायकों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख के खिलाफ विद्रोह कर दिया था, और असम के गुवाहाटी में रुके थे.

झारखंड में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘पार्टी इस मुद्दे पर अपना रुख बाद में बताएगी.” विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की झारखंड इकाई के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि कांग्रेस विधायकों को बताना चाहिए कि उन्हें इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कहां से मिली.

कांग्रेस के बयान का समर्थन पश्चिम बंगाल की सत्ता पर क़ाबिज़ तृणमूल कांग्रेस ने भी किया है. टीएमसी ने ट्वीट किया, ‘‘विधायकों की खरीद-फरोख्त और झारखंड सरकार को संभावित रूप से सत्ता से बाहर करने की अफवाहों के बीच झारखंड कांग्रेस के तीन विधायकों को बंगाल में भारी मात्रा में नकदी लाते हुए पकड़ा गया है. इस धन का स्रोत क्या है? क्या कोई केंद्रीय एजेंसी इस पर स्वत: संज्ञान लेगी? या नियम चुनिंदा लोगों पर ही लागू होते हैं?”

वहीं, झारखंड से निर्दलीय विधायक सरयू रॉय ने कांग्रेस से यह बताने को कहा है कि क्या विधायक नकदी लेकर झारखंड लौट रहे थे या झारखंड से किसी और राज्य में जा रहे थे. उन्होंने पूछा, ‘‘धन का स्रोत कौन-सा राज्य है-असम, बंगाल या झारखंड?” पश्चिम बंगाल की मंत्री शशि पांजा ने इस मामले की विस्तृत जांच की मांग की है.

उन्होंने कहा, ‘‘ईडी अधिकारी, क्या आप इस मामले का संज्ञान ले रहे हैं या मामला इतना गंभीर नहीं है? झारखंड के तीन विधायक जिस कार में सवार थे, उसमें से बरामद नकदी को गिनने के लिए मशीनें मंगवाई गई हैं.” ख़बर है कि हावड़ा ग्रामीण पुलिस को पश्चिम बंगाल की सीआईडी से वाहन में नकदी ले जाए जाने की ख़ूफ़िया सूचना मिली थी.

आपको बता दें कि झारखण्ड विधानसभा में 82 सीटें हैं और बहुमत के लिए 43 सीटों की ज़रूरत है. झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के पास 30, कांग्रेस के पास 17 सीटें हैं, राजद, एनसीपी और सीपीआई-एम्-एल-एल के पास भी एक सीट है. इसको मिलाकर सत्तारूढ़ गठबंधन के पास कुल 51 सीटें हैं वहीं भाजपा के पास 26 सीटें हैं और चार अन्य का समर्थन भी उसे प्राप्त है.

By Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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