PM मोदी को उन्हीं के खेल में हराने का ममता बनर्जी का ये है मास्टर प्लान! भाजपा भी परेशान..

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चु’नाव का दंगल चालू है। 4 चरणों के मतदान हो चुके है। अभी 4 बचे हुए चरणों का चुनाव बाकी है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल जनता को लु’भाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी की चुनावी रण’नीति थोड़ी खास नज़र आ रही हैं। ममता बनर्जी का जनाधार राज्य की महिलाओं पर टिका है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एक महिला ही है इसलिए राज्य की महिलाओं का रुख़ ममता बनर्जी की तरफ है। ममता अपनी रैलियों में महिलाओं को खासतौर पर सम्बोधित करती है। ममता अपने संबोधन में बांग्ला भाषा का इस्तेमाल करती हैं। पश्चिम बंगाल की अधिकतर महिलाओं को हिंदी भाषा नही आती। इसलिए ममता महिलाओं से सीधे संवाद करने की कोशिश करती है।

इसलिए ही वो बांग्ला में बोलते हुए बांग्ला बनाम अन्य का मुद्दा भी उठाती है। ममता बनर्जी अपने भाषण में राजवंशी समुदाय, मतुआ समुदाय और गोरखा समुदाय का उल्लेख करते हुए बताती हैं कि उन्होंने उनके लिए क्या किया है। साथ ही वो ये भी कहती हैं कि वो बंगाल को गुजरात और उत्तर प्रदेश नही बनने देंगीं। प्रधानमंत्री मोदी भी कुछ समय पहले गुजरात के चुनाव में यही नीति अपनाते थे।

पीएम मोदी गुजरात के चुनाव को गुजरात की अस्मिता से जोड़ते थे और यही रणनीति अब ममता बनर्जी भी अपना रहीं हैं। ममता भी बंगाल के चुनाव को बंगाल की अस्मिता से जोड़ रहीं हैं। पश्चिम बंगाल में हिंदी बोलने वाले ज़्यादातर लोग बीजेपी के साथ हैं। हावड़ा, कोलकाता और हुबली जैसे इलाकों में बडी संख्या में हिंदी बोलने वाले लोग हैं।

बीजेपी के वोटर्स को तोड़ने के लिए ममता बनर्जी ने अल्पसंख्यक और महिला वोटरों पर अपनी पकड़ बनाने की रणनीति अपनाई है। तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी ही स्टार प्रचारक है। ये कहना गलत नही होगा कि ममता चुनावी मैदान में ऑल’राउंडर की भूमिका निभा रही है।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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