तेल-अवीव: इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. नेतान्याहू पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए हैं और पिछले काफ़ी समय से वो सत्ता पर बने रहने की कोशिश में हैं. दो साल में 4 चुनाव हो चुके है लेकिन कोई भी दल सत्ता के लिए ज़रूरी बहुमत नहीं ला सका है. इसी वजह से नेतान्याहू गठबंधन बनाने में लगे हुए थे, हालाँकि अब ये मौक़ा उनके हाथ से निकल गया है.

ऐसी भी चर्चाएँ हैं कि नेतान्याहू ने प्रधानमंत्री बने रहने की पूरी कोशिश की और इसके लिए उन्होंने फ़िलिस्तीनी लोगों को उकसाने की भी कोशिश की, जिसके बाद हमास और इजराइल की जं’ग हुई. इस जं’ग से नेतान्याहू को उम्मीद थी कि उनकी छवि एक ताक़तवर नेता की बन कर उभरेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हमास ने इजराइल को बराबरी की जं’ग में भारी नुकसान पहुँचाया.

दूसरी ओर इजराइली सरकार ने दावा किया था कि वह ग़ाज़ा में अपनी सेना उतार देगी लेकिन ऐसा वो नहीं कर पायी. यहाँ तक कि हमास का भी इज़रायली सेना कोई ख़ास नुक़सान नहीं कर सकी. हमास ने भी इजराइल पर ताबड़तोड़ राकेट बरसाए. इस पूरी जं’ग में सिर्फ़ आम लोगों की ही हानि हुई. नेतान्याहू को लेकिन अब इस हार का ख़ामियाज़ा उठाना पड़ेगा.

इजराइल की कई राजनीतिक पार्टियों ने ये तय कर लिया है कि वे आपसी मतभेद भुलाकर नेतान्याहू को सत्ता से हटाने के लिए साथ आएँगे. विश्लेषकों की मानें तो ये लगभग तय है कि नेतान्याहू अब पद से हटने जा रहे हैं. ऐसा होने पर इजराइल में लम्बे चले नेतान्याहू युग की समाप्ति होगी. इतना ही नहीं नेतान्याहू के ख़िलाफ़ चल रहे मुक़दमों को भी अब ज़ोर मिलेगा.

By Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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