पटना: नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार को विकास के मामलें में पि’छड़ता हुआ बताया गया है। इस रिपोर्ट के बाद बिहार की राजनीति में विशेष राज्य के दर्जे की आवाज़ें उठने लगी हैं। जेडीयू बिहार के पिछड़ने का कारण विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त न होने को बता रही है तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष सरकार के द्वारा विशेष राज्य का दर्जा मांगने को फेलियर से ध्यान भटकाने का बहाना बता रहा है।

नीति आयोग द्वारा सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण के क्षेत्र में बनाई गई रिपोर्ट के अनुसार बिहार सबसे पीछे है। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा, बिहार के वि’भाजन के समय उद्योग, खनिज संपदा, पावर प्रोजेक्ट झारखंड को मिले। जिसकी वजह से बिहार और ज़्यादा पिछड़ता चला गया।

वहीं, दूसरी तरफ उपेन्द्र कुशवाहा ने अपने ट्वीट में लिखा, “बिहार-झारखंड विभाजन उपरांत प्राकृतिक संपदाओं का अभाव और बिहारवासियों पर प्राकृतिक आपदाओं का लगातार दंश के बावजूद नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA सरकार अपने कुशल प्रबंधन से बिहार में विकास की गति देने में लगी है, लेकिन वर्तमान दर पर अन्य राज्यों की बराबरी संभव नहीं है. नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट इसका प्रमाण है।

अतः विनम्र निवेदन है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की जदयू की वर्षों पुरानी लंबित मांग पर विचार करें और बिहार वासियों को न्याय दें”। शेष राज्य के दर्जे की मांग का समर्थन हम नेता जीतन राम मांझी ने भी किया है। राजद नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, “नीतीश कुमार की सत्तालोलुप अदूरदर्शी नीतियों, गलत निर्णयों और अक्षम नेतृत्व के कारण बिहार लगातार तीसरे वर्ष भी नीति आयोग की रिपोर्ट में सबसे फिसड्डी प्रदर्शन के साथ सबसे निचले पायदान पर है”।

बीजेपी प्रवक्ता अखिलेश सिंह ने विशेष राज्य के दर्जे वाली मांग पर कहा, जो लोग विशेष राज्य के दर्जे की मांग करते हैं उन्हें इसके नि’यमों से जुड़ी जानकारी नही है। बिहार को जब भी ज़रूरत पड़ी है केंद्र सरकार ने पूरी मदद की है। पीएम मोदी बिहार के विकास के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

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