बलरामपुर में कैसे हुई थी अटल की हार, बाहुबली रिज़वान ज़हीर ने जब पहली बार लड़ा लोकसभा चुनाव

Balrampur Lok Sabha Election

Balrampur Lok Sabha Election हम जानते हैं कि लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में अभी एक साल से कुछ अधिक समय बाक़ी है लेकिन ये भी सच है कि राजनीतिक दलों ने इसको लेकर प्लानिंग शुरू कर दी है. भाजपा सूत्रों की मानें तो आने वाले लोकसभा चुनाव में उनकी क्या रणनीति होगी इसकी तैयारी ज़ोरों से की जा रही है वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी काफ़ी सक्रिय दिख रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को अच्छी कामयाबी मिल रही है. भाजपा और कांग्रेस के अलावा जो दल हैं वो भी अपने अपने स्तर पर रणनीति बना रहे हैं. History of Balrampur Elections

लोकसभा चुनाव को लेकर जहाँ मुख्य दल रणनीति बना रहे हैं तो हमने तय किया है कि हम आपके लिए चुनाव और इसके इतिहास से जुड़े वीडियोस आपके लिए लाएँगे. इस कड़ी में हमारा पहला वीडियो बलरामपुर (Balrampur) से जुड़ा हुआ है. हम अच्छी तरह जानते हैं कि बलरामपुर के लोग बड़ी संख्या में हमारे चैनल से जुड़े हुए हैं, इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम इस श्रंखला का अपना पहला वीडियो बलरामपुर की सियासत से जुड़ा हुआ आपके सामने पेश कर रहे हैं.

Balrampur Lok Sabha Election History

बलरामपुर लोकसभा सीट 1957 में वजूद में आयी थी. इस वीडियो में हम बात करेंगे बलरामपुर में हुए सभी लोकसभा चुनाव के कुछ आँकड़ों की. भारत में पहले लोकसभा चुनाव 1952 में संपन्न हुए लेकिन बलरामपुर सीट 1957 में वजूद में आयी. देश के दूसरे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का सीधा मुक़ाबला किसी दल से नहीं था और कई दल अपनी अपनी विचारधारा के साथ मैदान में उतरे थे.

प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इण्डिया और भारतीय जनसंघ जैसे दल मुख्य विपक्ष बनने की कोशिश में लगे थे. इन सभी दलों के पास कुछ वोट्स थे लेकिन ये हर राज्य में प्रभावशाली नहीं थे. इन दलों की विचारधारा भी आपस में बहुत अलग थी इसलिए कांग्रेस के ख़िलाफ़ कोई एका भी नहीं बन पा रहा था. हालाँकि कुछ ऐसे पॉकेट्स थे जहाँ पर ये दल मज़बूत थे, ऐसा ही एक पॉकेट बलरामपुर में भारतीय जनसंघ के लिए माना जाता था.

1957 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जन्सघ के टिकट पर अटल बिहारी वाजपाई ने चुनाव जीता. उन्होंने कांग्रेस के हैदर हुसैन को हराया. अटल को 118,380 वोट मिले जबकि हैदर को भी 108,568 वोट मिले. 1962 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने सुभद्रा जोशी के पक्ष में बड़ा माहौल बनाया और इस बार अटल बिहारी वाजपाई चुनाव हार गए. सुभद्रा जोशी (Subhadra Joshi) को एक लाख दो हज़ार दो सौ साठ वोट मिले जबकि वाजपाई को एक लाख और दो सौ आठ वोट ही मिल सके.

सुभद्रा जोशी की जीत का अटल बिहारी को लगा था झटका

सुभद्रा जोशी का चुनाव जीतना अटल बिहारी के लिए व्यक्तिगत झटका था. 1962 में भारतीय जनसंघ की सीटें 4 से 14 हो गई थीं लेकिन वाजपाई अपनी सीट हार गए. 1967 के चुनाव को उन्होंने और मेहनत से लड़ा और अपनी पुरानी ग़लतियों को सुधारा. वाजपाई को चुनाव में बड़ी जीत मिली. उन्हें एक लाख बयालिस हज़ार चार सौ छेयालिस वोट मिले, सुभद्रा को एक लाख दस हज़ार सात सौ चार वोट ही मिल सके.

1971 में कांग्रेस ने इस सीट को वापिस जीता. चन्द्रभल मनी तिवारी यहाँ के सांसद चुने गए. 1977 में जब आपातकाल के बाद चुनाव हुए तो पूरे उत्तर भारत में कांग्रेस विरोधी लहर चल रही थी. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सरकार की नसबंदी योजना ने लोगों के मन में पार्टी के प्रति नफ़रत पैदा कर दी. भारतीय लोकदल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरा एकजुट विपक्ष ‘जनता पार्टी’ कहलाया. बलरामपुर सीट जनता पार्टी के टिकट पर नानाजी देशमुख ने जीती.

कुछ ही साल में लेकिन जनता पार्टी में टकराव शुरू हो गया और पार्टी बिखरने लगी. जनता पार्टी टूटी तो इससे फिर पुरानी पार्टियों ने नए नाम से जन्म लिया. जहाँ विरोधी बिखर गए थे, इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस फिर से एकजुट हो गई. और जब 1980 में लोकसभा चुनाव हुए तो बलरामपुर सीट एक बार फिर कांग्रेस के क़ब्ज़े में आ गई. चन्द्र भल मनी तिवारी (Chandra Bhal Mani Tewari) फिर से लोकसभा सांसद चुने गए. 1984 में महंत दीप नारायण ने कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीता. Balrampur Lok Sabha Election

1989 के लोकसभा चुनाव पिछले कई चुनावों से अलग थे. कांग्रेस के सामने जनता दल की बड़ी चुनौती थी जबकि भाजपा भी उत्तर भारत में मज़बूत होती दिख रही थी. बलरामपुर सीट पर लेकिन एक निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली. फ़सी-उर- रहमान मुन्नन ख़ान (Fasi Ur Rahman Munnan Khan) ने सीधे मुक़ाबले में भाजपा के सत्य देव सिंह को हरा दिया, कांग्रेस के चन्द्र भल तिवारी तीसरे स्थान पर चले गए. 1991 में भाजपा के सत्यदेव सिंह ने बहुत आसानी से चुनाव जीत लिया.

अकबाल हुसैन को सपा ने दिया टिकट

1996 के लोकसभा चुनाव में सत्यदेव सिंह के ख़िलाफ़ समाजवादी पार्टी ने अकबाल हुसैन को टिकट दिया. बलरामपुर की राजनीति पर बड़ा दबदबा रखने वाले हुसैन गैन्सड़ी सीट से कई बार विधायक चुने जा चुके थे. इस बार उन्होंने लोकसभा चुनाव में भाजपा के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया. अकबाल के पक्ष में माहौल बन ही रहा था कि बलरामपुर ज़िले की तुलसीपुर विधानसभा (Tulsipur) के तत्कालीन विधायक और बाहुबली नेता रिज़वान ज़हीर बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव में उतर गए. रिज़वान के चुनाव में उतरने से चुनाव त्रिकोणीय हुआ लेकिन इसका सीधा फ़ायदा भाजपा के सत्यदेव को हुआ. भाजपा विरोधी वोट बंट जाने से सत्यदेव को इस लोकसभा चुनाव में भी आसान जीत मिली.

सत्यदेव को एक लाख छेयासठ हज़ार से कुछ अधिक वोट मिले जबकि अकबाल हुसैन (Akbal Hussain) को एक लाख आठ हज़ार से कुछ अधिक, निर्दलीय रिज़वान ज़हीर को 99 हज़ार से कुछ अधिक वोट मिले.रिज़वान ज़हीर भले इस चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे लेकिन उनकी परफॉरमेंस ने ये साबित कर दिया कि अगर उन्हें कोई मज़बूत पार्टी टिकट दे दे तो वो चुनाव जीत जाएँगे. 1998 में समाजवादी पार्टी ने रिज़वान को टिकट दिया और रिज़वान ने सत्यदेव को सीधे मुक़ाबले में सत्तावन हज़ार से भी अधिक वोटों से हराया.

किसी एक दल या गठबंधन के सरकार में न टिक पाने की वजह से लोकसभा भंग हुई और 1999 में फिर से लोकसभा चुनाव हुए. बलरामपुर सीट पर एक बार फिर रिज़वान ने जीत हासिल की. रिज़वान को दो लाख पचपन हज़ार से कुछ अधिक वोट मिले जबकि भाजपा के कौशल तिवारी (Kaushal Tewari) को दो लाख पैंतीस हज़ार से कुछ अधिक वोट ही मिल सके. 2004 लोकसभा चुनाव से पहले रिज़वान ज़हीर (Rizwan Zaheer) ने पार्टी बदल दी. रिज़वान ने सिर्फ़ पार्टी ही नहीं बदली बल्कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर तीखी टिपण्णी की और कहा कि बलरामपुर से उन्हें कोई नहीं हरा सकता, ख़ुद मुलायम भी अगर बलरामपुर से लड़ जाएँ तो वो नहीं जीत सकते.

2004 का लोकसभा चुनाव रिज़वान ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लड़ा, भाजपा ने बृज भूषण शरण सिंह को मैदान में उतारा तो सपा की ओर से डॉक्टर मुहम्मद उमर को टिकट दिया गया. भाजपा के बृज भूषण को इस बार आसान जीत मिली. उन्हें दो लाख सत्तर हज़ार से अधिक वोट मिले जबकि दूसरे नम्बर पर रिज़वान ज़हीर को दो लाख अट्ठारह हज़ार से कुछ अधिक वोट ही मिल सके. सपा प्रत्याशी उमर को भी एक लाख पैंसठ हज़ार से अधिक वोट मिले. 2008 के परिसीमन में बलरामपुर लोकसभा सीट का वजूद ख़त्म कर दिया गया. इसका क्षेत्र श्रावस्ती में शामिल कर दिया गया. Balrampur Lok Sabha Election

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