बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा की सभी सीटों पर बुरी हार, एक भी सीट पर..

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और बिहार में हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं. महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और बिहार में एक-एक सीट के लिए विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आए हैं जबकि पश्चिम बंगाल की एक लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव का भी नतीजा आ गया है. इन उपचुनावों में भाजपा को बड़ा झटका लगा है. एक लोकसभा और 4 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में से किसी में भी भाजपा जीत नहीं हासिल कर सकी.

सबसे पहले बात पश्चिम बंगाल की करते हैं, यहाँ लोकसभा सीट आसनसोल के लिए उपचुनाव हुए. इस उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा को टिकट दिया. भाजपा की ओर से अग्निमित्रा पॉल को प्रत्याशी बनाया गया था. भाजपा ने ज़ोर-शोर से प्रचार किया कि तृणमूल कांग्रेस ने एक बिहारी को अपना प्रत्याशी बनाया है. शत्रुघ्न सिन्हा को बाहरी कहा गया तो शत्रु ने कहा कि वो बिहारी बाबू तो हैं ही, साथ ही बंगाली बाबू भी हैं.

भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने दम-ख़म से चुनाव लड़ा लेकिन तृणमूल के आगे भाजपा किसी टक्कर में नहीं दिखी. शत्रुघ्न सिन्हा अजेय बढ़त बना चुके हैं, और इस समय की बात करें तो वो 2,97,231 वोटों से आगे चल रहे हैं. उन्हें 647774 वोट मिले हैं जबकि भाजपा प्रत्याशी को 350543 वोट ही मिल सके हैं. सीपीआई(एम) के पार्था मुखर्जी तीसरे स्थान पर हैं, उन्हें 89112 वोट मिले. कांग्रेस और अन्य किसी मुक़ाबले में नज़र नहीं आए.

बात अगर बालीगंज विधानसभा उपचुनाव की करें तो यहाँ तृणमूल कांग्रेस के बाबुल सुप्रियो ने जीत हासिल की. बंगाल की इस सीट की भी बड़ी चर्चा थी लेकिन यहाँ मुक़ाबला तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई(एम) के बीच रहा. बाबुल सुप्रियो यहाँ 20228 वोटों से आगे हैं. सुप्रियो को 51199 वोट मिले हैं जबकि सीपीआई(एम) की सायरा शाह हलीम को 30971 वोट मिले हैं. भाजपा प्रत्याशी यहाँ तीसरे स्थान पर रहे, उन्हें महज़ 13220 वोट मिले.

बिहार की बहुचर्चित बोचहाँ विधानसभा सीट की बात करें तो यहाँ राजद और भाजपा के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही थी. हालाँकि शुरू से ही ये अनुमान था कि बोचहाँ में राजद मज़बूत रहेगी. राजद ने इस बात को सिद्ध भी किया और यहाँ बड़ी जीत हासिल की. बोचहाँ से राजद के अमर कुमार पासवान ने 36653 वोटों से जीत दर्ज की. उन्हें 82562 वोट मिले जबकि भाजपा की बेबी कुमारी को 45909 वोट मिले, VVIP प्रत्याशी गीता कुमारी को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा.

गीता कुमारी को 29279 वोट मिले. कांग्रेस और अन्य दलों के प्रत्याशी यहाँ किसी तरह का कोई कमाल नहीं दिखा सके और कुछ ही वोटों के अन्दर सिमट गए. राजद की इस जीत के साथ बिहार विधानसभा में राजद की 76 सीटें हो गई हैं. समूचे विपक्ष की बात करें तो अब विपक्षी सीटें 116 हो गई हैं वहीं NDA के पास अभी भी 127 सीटें हैं.

243 विधानसभा सीटों वाली विधानसभा में 122 सीटें बहुमत के लिए चाहिएँ, ऐसे में अगर NDA की 6 सीटें खिसक कर विपक्षी ख़ेमे में आ जाएँ तो सरकार गिर जाएगी. इस पूरे मामले में हिन्दुस्तानी आवामी मोर्चा का भी अहम् रोल है, जीतन राम माँझी की पार्टी की कुल 4 सीटें हैं और अगर ये NDA से हट जाएँ तो NDA के पास बहुमत और कम हो जाएगा. इन्हीं सब समीकरणों की वजह से बोचहाँ विधानसभा उपचुनाव की बेहद अहम् भूमिका मानी जा रही थी.

छत्तीसगढ़ की खैरागढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव को भी कांग्रेस और भाजपा ने साख की लड़ाई बनाया हुआ था. इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी 19381 वोटों से आगे चल रहीं हैं. कांग्रेस की यशोदा नीलाम्बर वर्मा को 84119 वोट मिले हैं जबकि भाजपा की कोमल जंघेल को 64738 वोट ही मिल सके हैं. कांग्रेस हाल ही में हुए पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पिटी थी, ऐसे में उसके लिए ये छोटी जीत भी बड़ा हौसला पैदा कर सकती है.

महाराष्ट्र की कोल्हापुर उत्तर में भी कांग्रेस ने जीत हासिल की है. कांग्रेस प्रत्याशी जाधव जयश्री चन्द्रकांत उर्फ़ अन्ना की 18847 वोटों की मज़बूत बढ़त है. कांग्रेस प्रत्याशी को 96492 वोट मिले हैं जबकि भाजपा के यशवंत कृष्णा सहेलाके उर्फ़ नाना को 77645 वोट मिले.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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