केंद्र सरकार की सेना में भर्ती की नई योजना ‘अग्निपथ’ के ख़िलाफ़ देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हो रहा है. कम से कम 7 राज्यों में शुक्रवार को हिंसक प्रदर्शन हुए. सबसे ज़्यादा असर बिहार और उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है. तेलंगाना में भी हिंसक प्रदर्शन हुए जिसमें एक व्यक्ति की मौत की ख़बर है.

तेलंगाना के सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन बुरी तरह हिंसक हो गया. प्रदर्शनकारियों ने आगज़नी और पथराव किया. पुलिस ने उग्र भीड़ को हटाने के लिए हवाई फ़ायरिंग की. इसी दौरान एक व्यक्ति की जान चली गई और 15 से अधिक लोग घायल हो गए. बिहार और उत्तर प्रदेश में भी रेलवे स्टेशनों पर भारी तोड़फोड़ की ख़बर है. तेलंगाना, यूपी और बिहार के अलावा मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और दिल्ली में भी प्रदर्शन की आंच पहुंची है.

उत्तर प्रदेश के बलिया में सुबह रेलवे स्टेशन पर आगज़नी और तोड़फोड़ की गई. ज़िलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने सूचना दी कि अब तक 100 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है और कार्रवाई की जा रही है. मथुरा और आगरा में भी भयानक हंगामा देखने को मिला वहीं इस प्रदर्शन की आग बनारस तक पहुँच गई है. यहाँ बसों में तोड़फोड़ की ख़बर है.

यूपी में प्रदर्शनकारियों ने आज आगरा-ग्वालियर-मुंबई मार्ग पर जमकर उत्पात मचाया और रोड को जाम कर दिया. इस दौरान पुलिस की गाड़ी पर पथराव भी किया गया. यमुना एक्‍सप्रेसवे पर अग्निपथ योजना के विरोध में कुछ लोगों ने बस को पलट दिया. वायरल हुए वीडियो में एकत्र युवाओं को बस को पलटते हुए देखा जा सकता है.

हरियाणा में भी हालात तनावपूर्ण दिखे. गुरुग्राम ज़िला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर धारा 144 लागू कर दी है, हालांकि यहां शुक्रवार को दोपहर तक कोई ताज़ा विरोध नहीं हुआ था. उपायुक्त निशांत यादव ने कहा कि यह आदेश इसलिए जारी किया गया, क्योंकि दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है और प्रशासन ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजारों, राष्ट्रीय राजमार्गों और बिजली ग्रिड सहित जिले के विभिन्न स्थानों पर गुस्साई भीड़ के जुटने की आशंका जताई है. नोएडा में भी पुलिस अलर्ट पर है.

‘अग्निपथ’ स्कीम के विरोध में सबसे ज़्यादा हिंसक प्रदर्शन बिहार में हो रहे हैं. यहाँ नेताओं को भी जनता के ग़ुस्से का सामना करना पड़ रहा है. उपमुख्यमंत्री रेणु देवी के बेतिया के आवास पर हमला किया गया था. इसके बाद बीजेपी के बिहार इकाई के अध्यक्ष संजय जायसवाल के आवास पर भीड़ ने हमला किया. वो उस दौरान घर में ही थे. हमले में घर मे लगे गेट को तोड़ने का प्रयास किया गया. घर का शीशा चकनाचूर हो गया. शहर के अस्पताल रोड स्थित प्रदेश अध्यक्ष के आवास को निशाना बनाया गया जिसमें एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया है.

केंद्र की सत्ता पर क़ाबिज़ भाजपा के नेताओं को और पार्टी कार्यालयों को जनता के ग़ुस्से का सामना करना पड़ रहा है. मधेपुरा भाजपा कार्यालय में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ और आगज़नी की. जानकारी है कि 500 से अधिक नौजवानों की भीड़ अचानक से बीजेपी ऑफिस पहुंच गई, वहां पहले से पुलिस की तैनाती की गई थी लेकिन भीड़ को देखकर पुलिस भाग गई.

नालंदा के इस्लामपुर स्टेशन पर खड़ी इस्लामपुर हटिया एक्सप्रेस ट्रेन में भीड़ ने आग लगा दी, जहां 3 एसी बोगी जलकर राख हो गईं. इस दौरान कई बोगियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. बता दें कि इसके पहले सुबह में ही बिहार में समस्तीपुर, सुपौल और लखीसराय में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन में आग लगा दी थी.

बिहार के एडीजी लॉ संजय सिंह ने कहा है कि अग्निपथ स्कीम के विरोध में प्रदर्शन और हिंसा कर रहे 125 लोगों को हिरासत में लिया गया है. उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 24 FIR दर्ज की गई हैं. बिहार के एडीजी लॉ संजय सिंह ने कहा है कि अग्निपथ स्कीम के विरोध में प्रदर्शन और हिंसा कर रहे 125 लोगों को हिरासत में लिया गया है. उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 24 FIR दर्ज की गई हैं.

प्रदर्शन से रेलवे ट्रेफ़िक बुरी तरह प्रभावित हुआ है. रेलवे ने कहा कि बुधवार को प्रदर्शन शुरू होने के बाद से 35 ट्रेन रद्द कर दी गयीं जबकि 13 का गंतव्य से पहले ही समापन कर दिया गया. प्रदर्शन का सबसे अधिक प्रभाव पूर्व मध्य रेलवे पर पड़ा है जिसके अंतर्गत बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई हिस्से आते हैं. इन राज्यों में सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है, ऐसे में पूर्व मध्य रेलवे ने प्रदर्शन के कारण आठ ट्रेनों के परिचालन की निगरानी करने का फैसला भी किया गया है.

जहाँ देश के कई राज्यों में ‘अग्निपथ स्कीम’ का भीषण विरोध हो रहा है वहीं भाजपा नेता और मंत्री इस योजना को प्रोमोट कर रहे हैं और साथ ही इसकी तारीफ़ कर रहे हैं. इस योजना में सबसे बड़ा विवाद का कारण इसका 4 साल के लिए होना है. इस योजना के तहत 4 वर्ष तक सेना में रोज़गार दिया जाएगा और इसके बाद उन्हें रिटायर होना पड़ेगा. लम्बे समय से रोज़गार की आस लगाए युवाओं ने इस स्कीम को सिरे से नकार दिया है. वो माँग कर रहे हैं कि सरकार इस योजना को वापिस ले और पुराने पैटर्न पर नौकरियों की भर्ती करे.

By Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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