नई दिल्ली: अफ़ग़ानिस्तान के पंजशीर प्रांत में तालिबान और तालिबान विरोधी नोर्दर्न अलायन्स के बीच जंग अब अंतिम पड़ाव पर पहुँच गई है. ऐसी अपुष्ट ख़बरें आ रही हैं कि तालिबान ने पंजशीर पर क़ब्ज़ा कर लिया है. रविवार को भीषण गोलीबारी हुई, इस गोलीबारी में विरोधी गुट के मुख्य प्रवक्ता फ़हीम दश्ती की गोली लगने से मौ’त हो गई.

एक प्राइवेट चैनल को दिए इंटरव्यू में दश्ती ने कहा था कि अगर हम मर गए तो इतिहास हमारे जैसे उन लोगों के बारे में लिखेगा, जो आखिरी दम तक अपने देश के लिए खड़े रहे. दश्ती ने तालिबान के साथ सरकार में शामिल होने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. उन्होंने कहा था कि तालिबान के साथ सत्ता में शामिल होने की बजाय उनकी फौज युद्धग्रस्त देश के अच्छे भविष्य के लिए मरना पसंद करेगी.

दश्ती ने पिछले हफ्ते ही प्राइवेट चैनल एनडीटीवी के साथ बातचीत में कहा था, “अगर हम अफगानिस्तान के लोगों के भविष्य को बेहतर बनाने के अपने मकसद में कामयाब रहे, ऐसा मुल्क, ऐसा सिस्टम जहां अफगान नागरिकों के प्रति जिम्मेदार लोगों की सरकार हो, तो हम अपनी जिम्मेदारियों पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे.”

उन्होंने यह भी कहा था, अगर हम मुकाबला करते वक्त मारे गए तो भी यह हमारे लिए जीत होगी, क्योंकि इतिहास हमें ऐसे लोगों के तौर पर याद रखेगा, जो आखिरी वक्त तक देश के लिए लड़ते रहे. उल्लेखनीय है कि तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर 15 अगस्त को क़ब्ज़ा कर लिया.

इसके पहले पूर्व राष्ट्रपति अशरफ़ अली ग़नी देश से भाग खड़े हुए थे जिसके बाद तालिबान की जीत निश्चित हो गई. पंजशीर का ही एक इलाक़ा बाक़ी था जिस पर अब तक तालिबान का क़ब्ज़ा नहीं हो पाया था, अब लेकिन ख़बर है कि पंजशीर के विद्रोह को तालिबान ने कुचल दिया है. आपको बता दें कि सन 2001 में अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में तब चल रहे तालिबान शासन को ख़त्म करने के लिए युद्ध किया था.

इसके बाद से वहाँ लगातार अमरीकी सेना थी लेकिन अमरीका ने पिछले साल ही ये फ़ैसला किया कि उसकी सेना अफ़ग़ानिस्तान से लौट आएगी. 31 अगस्त को अमरीका की पूरी सेना वापिस लौट गई. अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सेना के लौटने के फ़ैसले के बाद तालिबान ने देश पर क़ब्ज़ा कर लिया.

By Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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