नई दिल्ली: आज दिल्ली के विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई. चुनाव 8 फरवरी को होंगे. इसके साथ ही दिल्ली के लिए ये चर्चा तेज़ हो गई है कि इस बार बाज़ी कौन मारेगा. पिछले काफ़ी समय से ये माना जा रहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अभी भी सबसे पोपुलर नेता हैं. उनके बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने जनता के हित के काम किए हैं. वहीँ भाजपा की कोशिश है कि सत्ता में किसी तरह से वापसी कर पाए.

केंद्र की सत्ता पर क़ाबिज़ भाजपा पूरी कोशिश में है कि इस बार वो चुनाव जीते लेकिन वो ज़मीन पर उतनी मज़बूत नज़र नहीं आ रही है. अमित शाह हर तरह से कोशिश कर रहे हैं, कहा जा रहा है कि दिल्ली को जीतना भाजपा के सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक है. इसमें आम आदमी पार्टी और भाजपा के अलावा कांग्रेस भी प्रभावी दल माना जा रहा है.

लम्बे समय तक राज्य की सत्ता पर राज करने वाली कांग्रेस अन्ना आन्दोलन के बाद बहुत पीछे चली गई और पिछले चुनाव में उसे एक भी सीट नहीं मिली. जानकार मानते हैं कि पाँच साल में कांग्रेस ने कुछ ज़मीन वापिस हासिल कर ली है. हालाँकि आम आदमी पार्टी को भाजपा या कांग्रेस किसी से भी विशेष टक्कर मिलेगी ये वक़्त ही बतायेगा. इस बीच एबीपी ने एक सर्वे जारी किया है.

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए हुए इस सर्वे के मुताबिक़ कुल 70 में से आम आदमी पार्टी को 59 सीटें मिल सकती हैं. यानी वो आसानी से सरकार बना लेगी. ये दो तिहाई बहुमत से भी अधिक संख्या है. भाजपा को आठ सीटें मिल सकती हैं जबकि कांग्रेस भी तीन सीटों पर अपना परचम लहरा सकती है. इस सर्वे की मान लें तो भाजपा को 5 और कांग्रेस को 3 का फ़ायदा है पर ये किसी तरह से फायदे की गिनती में शुमार नहीं होने पायेगा क्यूँकी ये संख्या बहुत कम है.

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