2016 में द’र्दना’क हा’दसे से गु’ज़री थीं मीराबाई चानू, टोक्यो में रच दिया इतिहास…

टोक्यो: टोक्यो ओलिंपिक की शुरुआत हो गई है. भारत ने ओलिंपिक प्रतियोगिता के पहले ही दिन कमाल का प्रदर्शन किया है. भारतीय वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू ने इस ओलिंपिक में भारत को पहला मैडल जिताया है. उन्होंने वेटलिफ़्टिंग में सिल्वर मेडल हासिल किया है. इस प्रतियोगिता में सिल्वर मैडल जीतने वाली वो भारत की पहली एथलीट बन गई हैं.

उन्होंने 49 किलोग्राम भार में यह पदक जीता है. इस वर्ग में चीन की होऊ ज़हुई ने गोल्ड और इंडोनेशिया की विंडी असाह ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. चानू ने कुल 202 किलोग्राम भार उठाकर भारत को सिल्वर मेडल दिलाया. 2016 रियो ओलंपिक में बेहद ख़राब प्रदर्शन से लेकर टोक्यो ओलंपिक में मेडल तक चानू का सफ़र ज़बरदस्त रहा है. जब पिछली बार वो रियो ओलंपिक गई थीं तो कहानी एकदम अलग थी.


बीबीसी की हिन्दी न्यूज़ वेबसाइट में छपी ख़बर के मुताबिक़ पिछले ओलिंपिक में उनको अच्छा नतीजा नहीं हासिल हुआ था जिसके बाद वो कुछ समय के लिए अवसा’द में भी चली गई थीं. 2016 में भारत की वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसकी वजह से वो निराश हो गईं. ओलंपिक में अपने वर्ग में मीरा सिर्फ़ दूसरी खिलाड़ी थीं जिनके नाम के आगे ओलंपिक में लिखा गया था ‘डिड नॉट फ़िनिश’.

जो भार मीरा रोज़ाना प्रैक्टिस में आसानी से उठा लिया करतीं, उस दिन ओलंपिक में जैसे उनके हाथ बर्फ़ की तरह जम गए थे. उस समय भारत में रात थीं, तो बहुत कम भारतीयों ने वो नज़ारा देखा. सुबह उठ जब भारत के खेल प्रेमियों ने ख़बरें पढ़ीं तो मीराबाई रातों रात भारतीय प्रशंसकों की नज़र में विलेन बन गईं. नौबत यहाँ तक आई कि 2016 के बाद वो डिप्रेशन में चली गईं और उन्हें हर हफ्ते मनोवैज्ञानिक के सेशन लेने पड़े.

इस असफलता के बाद एक बार तो मीरा ने खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ज़बरदस्त वापसी की. मीराबाई चानू ने 2018 में ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रमंडल खेलों में 48 किलोवर्ग के भारोत्तोलन में गोल्ड मेडल जीता था और अब ओलंपिक मेडल.

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