युवाओं को आगे बढ़ाना है तो सही ताली’म और समझदार सोसायटी होना ज़रूरी है- तारिक़ फ़ैज़

भारत मनोरंजन दुनिया

हाल ही में जब “मेन्स्ट्रू’अल हाइ’जीन डे”मनाया गया तो इस मौक़े पर लॉं’च किया गया एक गीत जो बात करगा है महिलाओं के मासि’क धर्म से जुड़ी समस्याओं की भी और भ्रांतियों की भी, इस गीत के ज़रिए समाज में चली आ रही मासिक धर्म पर बात न करने की रुढ़ी को तोड़ने की कोशिश की गयी है। इस गीत को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने भी शेयर किया। यही नहीं इस गीत को लिखने वाले तारिक़ फ़ैज़ को कई सम्मान भी मिले। तारिक़ फ़ैज़ इस गीत को लिखने से पहले किन विचारों ने घेरा और पेशे से डॉक्टर तारिक़ फ़ैज़ को गीत लिखने का शौक़ कैसे हुआ? ऐसी ही कई बातें हुईं इस मुलाक़ात में आप भी पढ़िए

1- आपका लिखा हुआ एक गीत इन दिनों सभी पसंद कर रहे हैं “मा सिक चक्र” से सम्बंधित इस गीत को लिखते समय आपको किस तरह की उल’झनें हुईं?तारिक़– सबसे पहले तो ये एक बहुत ही ना’ज़ुक विषय है जिस पर शाइरी लिखने का किसने आज तक सोचा नहीं था। जब मुझ तक ये ज़िम्मेदारी आयी तो, मुझे भी यही परे’शानी हो रही थी कि किस तरह इस पर शाइरी होगी। इश्क़, जुदाई, ग़म, मुहब्बत इसपे शाइरी हमने हमेशा पढ़ी भी थीं और लिखी भी, लेकिन फिर ख़ु’दा का करम हुआ कि उसने एक ख़ूबसूरत ख़याल अता किया कि “ख़ू’न जि’स्म में बहे तो बस जा’न चले! ख़ू’न जि’स्म से निकले तो ये जहाँ चले!!” क्योंकि मे’न्स्ट्रूअल साइकल प्रेग्नन्सी के लिए बहुत इम’पोर्टंटे है।

2- क्या आप पहली ही बार में इस गीत को लिखने के लिए तैयार हो गए थे या मन में कोई दो राय थी?तारिक़– जी मैं ये गीत लिखने को तैयार तो हुआ था लेकिन दिल में ये ख़याल ज़रूर आ रहे थे कि अगर ये गीत कोई फ़ीमेल राइटर लिखे तो ज़्यादा बेहतर होगा, क्योंकि शाइरी में इंसान ख़ुद की आप बीती कहता है। लेकिन फिर मुझे अहसास हुआ कि शेर की एक ज़ि’म्मेदारी दूसरों का द’र्द ब’यान करना भी है। तो फिर मैंने इरादा किया लिखने का और खु’दा ने नवाज़ दिया।

Tariq faiz- Rameez Raza

3- इस गाने को लिखने के बाद आपको क्या फ़ील हुआ? आसपास की महिलाओं को लेकर आपके कोई विचार बदले ?तारिक़– सबसे पहले ख़ु’दा का शुक्र है जिसने हमारी कोशिशों को कामयाब किया। ये गीत ही दुनिया की हर महिला के लिए मेरा तोहफ़ा है और मैं अपने अ’ब्बू मो’हम्मद रफ़ीक नदवी शाद अकोलवी साहब जो एक बहुत बड़े शाइर हैं और मेरे अम्मी जा’न का शुक्रगुज़ार हूँ, जिन्होंने मुझे बचपन से उ’र्दू का ख़ूबसूरत माहौल दिया। 4- जब इस गाने को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने शेयर किया तो उस वक़्त आपका कैसा अनुभव रहा?तारिक़– मुझे बेइंतिहाँ ख़ुशी हुई कि हमारी मेहनत को इतनी बड़ी शख़्सियत ने सहारा और इसलिए महसूस हुआ कि हम काफ़ी हद तक कामयाब भी हुए हैं।

5- एक बात जो मन में चल रही थी कि ये MBBS और क्लासिकल म्यूज़िक का संगम किस तरह से हुआ..म्यूज़िकल इलाज करने का कोई विचार है आपका?तारिक़– मैं बचपन से डॉक्टर बनना चाहता था लेकिन 2007-08 में मैं उस्ताद नुसरत फ़तह अली ख़ा’न साहब को पहली बार सुना। उनके बाद मैंने पंडित इरज लांडे साहब से शगिर्दी की, जो के पटियाला घराने से ताल्लुक़ रखते हैं और हमारे विदर्भ के बड़े उस्तादों में से एक हैं। MBBS के दौरान भी मुझे काफ़ी परे’शानियों का सामना करना पड़ा क्योंकि मैंने पढ़ाई के साथ-साथ अपना रिया;ज़ भी कर रहा था, सीख भी रहा था और पर्फ़ॉर्म भी कर रहा था। MBBS और संगीत दोनों ही अपने आप में समंदर की तरह हैं, तो उन्हें सम्भालना बहुत मुश्कि’ल था पर नामुम’किन नहीं था। आज हिंदुस्तान भर में में शोज़ भी कर रहा हूँ और अपनी पढ़ाई भी कर रहा हूँ तो ये सब ख़ु’दा के करम से मुमकिन हो पाया है। बस मैं लगान और दीवानगी कभी कम नहीं हुई।

6- आपका ये गीत समाज में जाग’रूकता लाने वाला है ओ इस तरह का और कोई विषय है जिस पर आप ख़ुद काम करना चाहते हैं?तारिक़– जी बिलकुल इस तरह के बहुत विषय हैं इन पर काम ज़रूरी है और हम उन पर काम करना चाहते हैं। जैसे कि पेड़ों के क’टने के बारे में, पानी की क’मी के बारे में, समाज में बढ़ते न’शे के बारे में आदि।7- जो आपको एक अलग पहचान इस गीत के ज़रिए मिली है उसको आप किस तरह से देखते हैं? और इस पहचान से आप किस तरह के काम करना चाहते हैं?

group behind the song

तारिक़– जो कुछ भी मुमकिन हुआ है मेरे माता पिता की दुआएँ हैं और मेरे ख़ु’दा का करम है तो बस उनका शुक्र अदा करता हूँ और करता रहूँगा। आगे ज़िंदगी में काम करने के लिए मुझे डॉक्टर अल्लामा इक़बाल साहब का शेर याद रहता है, “सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्ति’हान और भी हैं!!” ये सब शुरुआत है अभी बहुत काम करना है।8- आप अपने लिखे गीतों से किस हद तक संतुष्ट होते हैं? क्या आपको लगता है कि आपको कुछ और जोड़ना चाहिए?तारिक़– हर आर्टिस्ट पब्लिक की अमानत होता है, तो हमें तो अपनी चीज़ों में बहुत सा अधूरापन महसूस होता है। पब्लिक और सोसायटी के रेसपोंस से ही ये पता चलता है कि कौन- सा काम कामयाब है और कौन-सा नहीं।

9- अपने करियर के तौर पर आप MBBS को चुनना चाहते हैं या संगीत को?तारिक़– अभी तक दोनों साथ में चले हैं अगर ख़ु’दा की मर्ज़ी रही तो मैं दोनों को साथ लेकर चलूँगा।10- आए दिन देश के युवाओं को ग़ैर ज़िम्मे’दार कहा जाता है आपको क्या लगता है कि देश के युवा वर्ग अपनी ज़िम्मे’दारी किस हद तक निभा रहे हैं?तारिक़– युवाओं को सही तालीम अगर मिले और समझदार सोसायटी मिले तो ज़रूर वो एक सही दिशा में काम करते हैं। ज़रूरत है सोसायटी को बदलने की, अच्छे एजुकेशन सिस्टम की, इकोनॉमी को स्ट्रोंग करने की। यह सब होगा तो ज़रूर युवा ज़्यादा से ज़्यादा देश और दुनिया के लिए काम करेंगे, जैसे बहुत से युवा काम कर रहे हैं।

2 thoughts on “युवाओं को आगे बढ़ाना है तो सही ताली’म और समझदार सोसायटी होना ज़रूरी है- तारिक़ फ़ैज़

  1. Such a brilliant taks done by mr tariq faiz
    It was not so easy to write the song on menstruation cycle

    Well done dr sahab..

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