ये पाकि’स्तानी परिवार नहीं भू’लेगा हिंदुस्तान की दरि’यादिली, व’जह है ऐसी कि आप भी भर उठेंगे गर्व से

यूँ तो भारत और पाकिस्तान के रि’श्तों में ख’टास आ गयी है लेकिन फिर भी दोनों ही देशों में रहने वाले लोग एक जैसे ही हैं। शायद यही कारण है कि जब किसी मुश्कि’ल समय में म’दद माँ’गी जाती है तो म’दद के लिए हाथ बढ़ ही जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ जब पाकि’स्तान के एक परिवार ने भारत के सामने म’दद की बात कही। बात भी कुछ ऐसी थी कि कोई म’ना कर ही नहीं सकता था। दरअसल ये पाकि’स्तानी परिवार 6 साल की बच्ची के इला’ज के लिए भारत आना चाहता था।

ये 6 साल की पाकि’स्तानी बच्ची ओमै’मा अ’ली अपनी ज़िंदगी के लिए ल’ड़ाई लड़ रही है। जब परिवार को पता चला कि उसका इला’ज भारत में सम्भव है तो माता-पिता ने अपनी ओर से कोई कोशि’श बाक़ी नहीं रखते हुए भारत में बच्ची के इला’ज की इच्छा जतायी। इस 6 साल की पाकि’स्तानी बच्ची के लिए एक फरि’श्ता बनकर म’दद के लिए सामने आए गौतम गंभीर। उन्होंने मौ’त से लड़ रही इस बच्ची के इला’ज का बीड़ा उठाया है।

Gautam Gambhir

गौतम गंभीर का कहना है कि “मुझे हमेशा से ही पाकि”स्तानी अख़बार, आई’एस’आई और आतं’कियों से सम’स्या रही है, लेकिन अगर एक 6 साल की मा’सूम को भारत में इला’ज की बेहतर सुविधा मिलती है, तो इससे अच्छा और क्या हो सकता है”। गौतम गम्भीर ने न सिर्फ़ इला’ज में म’दद का वादा किया बल्कि उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से ओमै’मा अ’ली के दिल के ऑप;रेशन के लिए उसे और उसके परिवार को वी’ज़ा देने की अपी’ल की है।

गौतम ने अपने सोशल मीडिया के ट्विटर अकाउंट से ये पत्र शेयर किया था, जिसमें उन्होंने पाकि’स्तान में भार’तीय दूता’वास से भी अ’ली के परिवार को वी’ज़ा दिलाने के लिए म’दद मांगी है। इस पत्र के साथ ही गौतम गंभीर ने एक प्यारी सी कविता भी लिखी जो देखते ही देखते ट्रें’ड करने लगी। गौतम ने लिखा, “उस पार से एक नन्हे दिल ने द’स्तक दी, इस पार दिल ने सब सरह’दें मि’टा दीं, और नन्हे क़द’मों के साथ बहती हुई, मीठी हवा भी आई है, कभी-कभी ऐसा भी लगता है, जैसे बेटी घर आई है”

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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