मुंबई: शिव सेना ने बुर्क़े पर पाबंदी की बात को लेकर सामना में छपे एक एडिटोरियल से किनारा कर लिया है. शिव सेना ने इस बारे में एक बयान जारी कर कहा कि ये पार्टी का बयान नहीं है और एडिटोरियल लिखने वाले का अपना व्यक्तिगत बयान हो सकता है. शिव सेना के प्रवक्ता नीलम गोरहे ने इस बारे में एक बयान जारी कर कहा कि हर नीतिगत फ़ैसला नेताओं की मीटिंग के बाद लिया जाता है या उद्धव ठाकरे लेते हैं.

उन्होंने कहा कि आज के एडिटोरियल में जो बातें कही गई हैं वो बातें न तो नेताओं की मीटिंग में चर्चा में आया है और न ही इसकी घोषणा उद्धव ठाकरे ने की है..इसलिए ऐसा हो सकता है कि ये एडिटोरियल लिखने वाले का अपना मत हो जोकि श्रीलंका में घटित हुए ताज़ा हालत की वजह से दिया गया हो. आपको बताएँ जैसे ही सामना में ये एडिटोरियल छपा इस पर लोगों में चर्चा शुरू हो गई.

सांकेतिक तस्वीर

NDA के ही सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के नेता रामदास अठावले ने इस बात पर आपत्ति दर्ज कराई. उन्होंने कहा कि बुर्क़े पर पाबंदी नहीं लगनी चाहिए क्यूँकि ये भारत की परम्परा का हिस्सा है. आपको बता दें कि हाल ही में श्रीलंका में जो हालात बने हैं उसके बाद श्रीलंका की सरकार ने सभी तरह के बुर्क़े या मुँह ढँकने वाली चीज़ों पर पाबंदी लगा दी है. शिव सेना ने हालाँकि अपना पक्ष साफ़ करके विवाद को रोक दिया है. शिवसेना NDA की प्रमुख सहयोगी है जिसका महाराष्ट्र में मज़बूत आधार है.

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