विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में तेज़ हुई हलचल, ‘लालू नहीं चाहते थे कि..’

भारत राजनीति

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और राजनीतिक गहमागहमी भी राज्य में देखी जा सकती है. सभी दल अपनी अपनी ओर से मेहनत करने में लगे हैं. इस बीच गठबंधन राजनीति की भी कवायद तेज़ चल रही है. जैसे जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है वैसे वैसे भाजपा-जदयू में तो तकरार सामने आ ही रही है, दूसरी ओर महागठबंधन की पार्टियाँ भी अलग राग अलापने लगी हैं. ख़बर है कि हिन्‍दुस्‍तानी आवाम मोर्चा, विकासशील इंसान पार्टी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) जैसी छोटी पार्टियों ने राजद पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की है.

इस मुद्दे पर पार्टियों का कहना है कि जितना जल्दी हो सके को-ऑर्डिनेशन कमिटी बनाई जाए वरना ये पार्टियां मार्च के अंत तक अलग रास्ता ले सकती हैं. दूसरी ओर राजद ने भी कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा है कि राजद के बिना इन दलों का कोई महत्त्व नहीं है. इन सब बातों के बीच कांग्रेस इस कोशिश में है कि कोई रास्ता, कोई समाधान निकल आये. इसमें भी किसी को शक नहीं कि इस खींचतान से NDA के नेता ख़ुश नज़र आ रहे हैं.

इस बात पर जेडीयू के प्रधान महासचिव के सी त्यागी ने कहा कि हमारे एनडीए के मुक़ाबले महागठबंधन में समन्वय नहीं है. आरजेडी का स्वभाव है- खाओ और खाने मत दो. इसी के चलते जनता दल में आधा दर्जन बार फूट हुई. आरजेडी अकेले ही सम्पूर्ण सत्ता चाहती है, लिहाज़ा यह गठबंधन नहीं चलेगा. उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार के चलते पिछली बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली 40 सीटें मिली थीं, जबकि लालू यादव 20 से ज़्यादा सीट कांग्रेस को देने के पक्ष में नहीं थे.

वहीँ भाजपा भी कुछ इसी तरह की बात कहती नज़र आ रही है. दूसरी ओर इस मामले में पहले महागठबंधन की पार्टी रालोसपा कह रही थी कि सब ठीक है लेकिन अब उसको भी कुछ समस्याएं हो रही हैं. वो कह रही है कि राजद को चाहिए कि वो अपना रुख़ ज़रा ठीक करे. पार्टी के प्रधान महासचिव माधव आनंद ने कहा कि कुछ लोग चाहते हैं कि तेजस्वी यादव सीधा मुख्यमंत्री बन जाएं, लेकिन जब सभी लोग मिलेंगे तभी मुख्यमंत्री बन पाएंगे, नहीं तो किस्मत के धनी नीतीश कुमार फिर बनेंगे मुख्यमंत्री.

माधव आनंद ने कहा कि अगर समन्वय समिति नहीं बनानी है तो आप बोल दीजिए नहीं बनाएंगे आप लोग अपना रास्ता देखिए. हालांकि, माधव आनंद ने अभी भी आस नहीं छोड़ी है. उन्होंने कहा कि आरजेडी को अहंकार त्यागना होगा. उम्मीद है कि आरजेडी बनाएगी कमेटी. कांग्रेस इस सब के बीच कोशिश में लगी है कि किसी तरह से समन्वय स्थापित हो.

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