लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिये नामांकन का दौर चल रहा है। सपा,भाजपा,कांग्रेस,बसपा व अन्य दलों ने पंचायत स्तर के इन चुनावों को जीतने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। गौरतलब है जिला पंचायत चुनावों सत्ताधारी पार्टी भाजपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था,मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर ये साबित कर दिया था कि जनता में सपा की अपील अभी बनी हुई है। वहीं इस हार से भाजपा के पैरों तले जमीन खिसक गई थी।

इस हार के बाद भाजपा के राष्ट्रीय से लेकर प्रदेश भर के नेता ताबड़तोड़ बैठकों में लग गए थे। वहीं सपा इस जीत से आगामी विधानसभा चुनावों में सत्ता वापसी के ख्वाब सजाने लगी है। जिला पंचायत चुनावों के बाद आगामी 3 जुलाई को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मतदान होना है। जिसमें मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही बताया जा रहा है। इस कड़े मुकाबले के बीच एक खीं’चतान दोनों दलों के बीच कल देखने को मिली जब नामंकन करने जा रहे समाजवादी पार्टी के प्रत्यशियों को नामंकन भरने से रोका जा रहा था।

इस वजह से 11 जिलों में सपा के प्रत्याशी नामंकन फॉर्म भरने से वं’चित रह गए। जिसका फायदा भाजपा को मिला और उसके सभी प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिये गए। समाजवादी पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया है की उसके प्रत्यशियों का सरकार के कहने पर पु’लिस द्वारा उ’त्पीड़न किया।कुछ प्रत्याशियों को गा’यब कर दिया गया तो कुछ को नामंकन फॉर्म न भर पाए इसलिए उनके साथ हिं’सा की गयी।

पुलि’स चुपचाप हिं’सा करने वालों का साथ दे रही थी। ये 11 जिले हैं जहां सपा प्रत्याशी पर्चा दाखिल नही कर पाए। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संज्ञान लेते हुए तत्काल इन 11 जिलों के पार्टी जिला अध्यक्षों को हीलाहवाली बरतने पर तुरन्त ब’र्खास्त कर दिया है। अखिलेश यादव ने एक वीडियो पोस्ट करते हुए ट्वीट पर कहा है कि “बीजेपी सरकार ने गोरखपुर सहित अन्य जगहों पर सपा के प्रत्यशियों को नामाकन दाखिल करने से रोका है। ये हा’री हुई बीजेपी का चुनाव जीतने का नया प्रशासनिक हथकंडा है। बीजेपी जितने पंचायत अध्यक्ष बनाएगी जनता उतनी भी सीट नही देगी”.

गौरतलब हो कि जिला पंचायत के चुनाव में हार के बाद बीजेपी ने तय किया था कि 65 सीटें जिला पंचायत अध्यक्ष की हर हालत में जीतनी है। इसी के बाद से बीजेपी चुनाव को जीतने के लिए सरकारी मशीनरी का जीत के लिए इस्तेमाल करने से भी नही चूक रही है। अखिलेश यादव ने जिन 11 जिला अध्यक्षों को हटाया है उसमें गोरखपुर,आगरा,बलरामपुर,मऊ,झांसी, ललितपुर,मुरादाबाद,श्रावस्ती,गोण्डा,भदोई,गौतमबुद्ध नगर के नाम शामिल हैं।

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