वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, भारत में कोरो’ना म’रीजों के लिए सिर्फ़ 10 रुपए में..

July 20, 2020 by No Comments

कोरोनावायरस: पूरी दुनिया ही इस समय कोरो’ना वा’य’रस से जूझ रही है। दुनिया भर के लगभग सभी वैज्ञानिक इस जानलेवा बीमा’री की वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं। इसी बीच इंग्लैंड के शोधकर्ताओं का दावा है कि उन्हें ऐसी दवा मिली है जो कोरो’ना सं’क्र’मित लोगों के लिए कारगर साबित हो सकती है। रिसर्चर्स का कहना है कि डेक्सामेथासोन नामक दवा से कोरोना के म’रीजों की मौ’त में भारी गिरा’वट देखने को मिली है। इंग्लैंड के रिसर्चर्स ने एक स्टडी के दौरान 2104 म’रीजों को यह दवा दी थी। वहीं इन लोगों की तुलना अन्य 4321 म’रीज़ों से की, जिनकी सामान्य रूप से देखभाल की जा रही थीं।

इस स्टडी से रिसर्चर्स ने पाया कि डेक्सामेथासोन नामक यह दवा कोरो’ना के म’रीजों पर अच्छा असर कर रही है। आपको बता दें कि भारत में भी यह दवा उपलब्ध है। भारत की कई कंपनिया यह दवा बनाती है। देश में इस दवा की कीमत केवल 10 रुपए है। वहीं वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइजेशन ने भी इंग्लैंड द्वारा की गई इस रिसर्च पर खुशी जाहिर की है। डब्ल्यूएचओ ने एक बयान में कहा था कि “हम डेक्सामेथासोन पर हुए शोध का स्वागत करते हैं जो को’रो’ना में मृ’त्यु दर को कम कर सकता है। हमें जीवन को बचाने और नए सं’क्र’मण को रोकने पर ध्यान देना होगा।”

डब्ल्यूएचओ ने एक अन्य बयान में कहा था कि “ब्रिटेन में शुरुआती क्लिनिकल ट्रा’यल के परि’णामों का हम स्वागत करते हैं। कॉर्टिकोस्टेरॉयड डेक्सामेथासोन गंभीर को’विड-19 रो’गियों को दोबारा जीवन दे सकता है।” डब्ल्यूएचओ को जानकारी दी गई कि “शुरुआती परि’णाम इस ओर इशारा कर रहे हैं कि इसके इस्तेमाल से इलाज के दौरान होने वाली मौ’तों में 1 तिहाई तक कमी दर्ज की गई है।” डब्ल्यूएचओ से मिली जानकारी के अनुसार यह दवा कम लक्षणों वाले म’रीजों पर काम नहीं करती। इस दवा का असर उन्हीं लोगों पर होता है जिनमें कोरो’ना वा’य’रस के ज़्यादा लक्षण मौजूद हों।

Dexamethasone


इस संबंध में डब्ल्यूएचओ के चीफ टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि “यह दवा को’विड-19 के उन रो’गियों के लिए ज्यादा लाभकारी है जो वेंटिलेटर या ऑक्सीजन पर है। कोरो’ना के गं’भीर रो’गियों के मामले में मृ’त्यु दर कम करने में सफल माना जा रहा है यह पहला इलाज है।” उन्होंने बताया कि “मैं ब्रिटेन सरकार, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन के कई अस्पतालों और रो’गियों को शुभकामना देता हूं जिन्होंने इस वैज्ञानिक सफलता में अपना योगदान दिया।” मालूम हो कि अब से पहले भी 1960 के दशक में इस दवा का उपयोग सूजन को कम करने के लिया किया जाता था। वहीं साल 1977 में इस दवा को डब्ल्यूएचओ मॉडल लिस्ट में ज़रूरी दवाओं में शामिल किया गया था।

अब इस दवा का इस्तेमाल कोरो’ना से सं’क्र’मित म’रीज़ों पर किया जा रहा है और इस दवा के इस्तेमाल से मौ’तों में 35 फीसदी गिरा’वट आई है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता पीटर होर्बी ने इस दवा के परिणाम को लेकर कहा है कि “ये काफी उत्साहजनक नतीजे हैं।” उन्होंने कहा कि “मृ’त्यु दर कम करने में और ऑक्सीजन की मदद वाले म’रीजों में साफ तौर पर इसका फायदा हुआ। इसलिए ऐसे म’रीजों में डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल होना चाहिए। डेक्सामेथासोन दवा महंगी भी नहीं है और दुनियाभर में जान बचाने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है।”

वहीं हाल ही में यह भी कहा गया है कि “मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को’रो’ना वा’य’रस के उपचार में उपयोगी नहीं है।” जानकारी के मुताबिक इसमें 11,000 से अधिक म’रीजों को शामिल किया गया था, जो इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड से ताल्लुक रखते हैं। आपको बता दें कि कोरो’ना वा’य’रस का सं’क्र’मण लगतार फैलता ही जा रहा है। हर रोज़ वा’य’रस से सं’क्र’मित लोगों की ख’बरें सामने आ रही हैं।

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