देहरादून: उत्तराखंड में बीजेपी सरकार में हलचलों के बीच तीरथ सिंह रावत को उत्तरखंड की कमान सौंपी गई थी। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उपचुनाव को लेकर अटकलें लगाई जाने लगी। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए तीरथ सिंह रावत किस सीट से उपचुनाव में उतरेंगे इसपर सवाल जारी है। इस सवाल पर खुद तीरथ सिंह रावत ने विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि, यह निर्णय पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के हाथों में है, वह जैसा तय करेंगे वैसा ही होगा। उन्होंने आगे कहा कि, वह हमेशा पार्टी के फैसलों के स्वागत करते हुए आएं हैं। पार्टी उनके लिए जो फैसला करेगी उन्हें स्वीकार होगा।

मुश्किल समय मे पार्टी ने मुख्यमंत्री पद की जो ज़िम्मेदारी उन्हें सौंपी गई उसके लिए उन्होने पार्टी का आभार भी जताया। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए तीरथ सिंह रावत का विधायक के रूप में निर्वाचित होना जरूरी है, जब मार्च 2021 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। तब वह सांसद के रूप में जनप्रतिनिधि थे। एएनआई की​ एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस विषय पर चर्चा शुरू होने के बाद तीरथ सिंह रावत ने कहा कि “मैं इस बारे में फैसला नहीं करूंगा, पार्टी करेगी. दिल्ली तय करेगी कि मुझे कहां से चुनाव लड़ना है और मैं आदेश का पालन करूंगा”।

तीरथ सिंह रावत के उपचुनाव को लेकर दिए गए इस बयान के बाद उत्तराखंड में उपचुनाव को लेकर जताई जा रही संभावनाओं पर विराम लग गया। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे नवप्रभात ने यह दावा किया था कि मार्च 2022 में विधानसभा चुनाव हैं, इसलिए एक साल से भी कम समय होने के कारण राज्य में उपचुनाव नहीं करवाए जा सकते। उन्होंने,सीएम तीरथ सिंह रावत के पद बने रहने पर ‘संवैधानिक सं’कट’ शब्द का का ज़िक्र किया था। तीरथ सिंह रावत को 9 सितंबर तक विधायक के रूप में चुना हुआ निर्वाचित होना होगा तभी वह संवैधानिक रूप से सीएम पद पर आगे बने रहेंगे।

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