लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मकान मालिक और किरायेदार के बीच होने वाले झ’गड़ों को ख’त्म करने के लिए कदम उठाया है। सरकार ने इसके लिए आवास विभाग ने ‘उप्र नगरीय परिसरों की किरायेदारी विनियमन अध्यादेश-2021’ तैयार किया है। इस अध्यादेश को लागू करने से संबंधित प्रस्ताव को शुक्रवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है।

इसे जल्द ही लागू कर दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने भी प्रदेश सरकार को 11 जनवरी से पहले इस अध्यादेश को लागू करने के निर्देश दिए थे। केन्द्र सरकार के ‘टीनेंसी एक्ट’ के आधार पर तैयार किए गए इन नये अध्यादेश में मकान मालिक और किरायेदारों के लिए कई तरह के प्रावधान शामिल किए गए हैं।

नये कानून के लागू होने के बाद किरायेदार और मालिक के बीच लिखित अनुबंध करना अनिवार्य होगा। मकान मालिक को तीन माह के भीतर अनुबंध पत्र किराया प्राधिकरण में जमा करना होगा। किरायेदार रखने से पहले मकान मालिक को इसकी सूचना किराया प्राधिकरण को देना अनिवार्य होगा। पहले से रखे गए किराएदारों के मामले में यदि लिखित अनुबंध नहीं है तो लिखित अनुबंध करने के लिए लिए तीन माह का मौका दिया जाएगा।

किरायेदार के लिए नियम होगा कि उसे रहने वाली जगह की देखभाल करनी होगी। मकानमालिक की इजाज़त के बिना किरायदार तोड़फोड़ नही कर सकता। मकानमालिक को किराएदार लो ज़रूरी सेवाएं देनी होंगी। कानून में यह प्रावधान किया गया है कि आवासीय भवनों के किराये में पांच फीसदी और गैर आवासीय भवनों के किराये में प्रतिवर्ष सात फीसदी ही किराया बढ़ाया जा सकेगा।अगर किरायदार दो महीने का किराया नहीं दे पाएगा तो उसके मकान मालिक हटा सकेगा।

एडवांस के मामले में आवासीय परिसर के लिए सिक्योरिटी डिपाजिट दो महीने से अधिक नहीं होगा और गैर आवासीय परिसर के लिए छह माह का एडवांस लिया जा सकेगा। किरायेदारी की अवधि का निर्धारण और नवीनीकरण मकान मालिक और किरायेदार के बीच किया जाएगा। यह अनुबंध पत्रों की शर्तों के आधार पर होगा।

मृत्यु के मामले में उत्तराधिकारियों के अधिकार अनुबंध पत्र की शर्तें मकान मालिक के साथ-साथ किरायेदार के उत्तराधिकारियों पर भी लागू होगी। प्रत्येक आवासीय योजना में न्यूनतम 250 भवन होंगे। इसमें 35 प्रतिशत क्षेत्रफल पर कम आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के भवनों का निर्माण किया जाना है। विकासकर्ता द्वारा प्रति ईडब्ल्यूएस अवास पर 22.77 वर्ग मीटर कारपेट एरिया के लिए 6 लाख तथा 22.77 वर्ग मीटर से 30 वर्ग मीटर के कारपेट एरिया के भवनों के लिए प्रो-रोटा क्षेत्रफल के आधार पर न्यूनतम सीलिंग कास्ट रखने का प्रावधान किया जा रहा है।

योजना के अंतर्गत विकासकर्ता को 2.50 लाख रुपये अनुदान मिलेगा। इसमें 1.5 लाख केंद्र सरकार से केंद्रांश के रूप में जबकि 1 लाख रुपये राज्यांश के रूप में मिलेगा। अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने कहा है कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में पीएम आवास योजना लागू होने से एनसीआर क्षेत्र के गरीब परिवारों की आवासीय समस्या दूर होगी।

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