एक समय बीज़ान्टिन एम्पायर का बहुत नाम था। रोमन एम्पायर के बाद बीज़ान्टिन ने ही साम्राज्य स्थापित किया था। एक समय ऐसा लगता था कि ये ईसाई साम्राज्य कभी हराया न जा सकेगा लेकिन तभी तुर्क साम्राज्य की नींव रखी जाने लगी। मज़बूत बीज़ान्टिन साम्राज्य के शासक को इसकी भनक लगने लगी और इसने कोशिश करनी शुरू की कि इसे आगे ना बढ़ने दिया जाए।

हम आज जिस युद्ध की बात करने जा रहे हैं ये 17 सितंबर, 1176 को लड़ा गया था। इस युद्ध का नाम मैरिओकेफलों की जंग है। इस युद्ध को बेसेहिर लेक के पास लड़ा गया था जो आज तुर्की में है।


सेल्जुक तुर्क को ख़त्म करने के इरादे से बीज़ान्टिन ने एक स्ट्रेटेजी अपनाई, और अनातोलिया पर हमला करना तय हुआ। इतिहासकार मानते हैं कि ये बीज़ान्टिन एम्पायर की अंतिम कोशिश थी कि वो तुर्क को अनातोलिया से बाहर कर पाए परंतु तुर्क सैनिक इस हमले के लिए पहले से ही तैयार थे। इतिहासकार मानते हैं कि दोनों ओर से 35-35 हज़ार सैनिक लड़े लेकिन बीज़ान्टिन के पास उस समय के सबसे अच्छे हथियार भी थे और अच्छी तरह से उनकी ट्रेनिंग भी हुई थी।


इसके बावजूद तुर्क मुसलमानों ने मोर्चा संभाला और आक्रमणकारी फ़ौजों को भागना पड़ा। जानकार मानते हैं कि ये बीज़ान्टिन एम्पायर के ख़ात्मे की शुरुआत थी। इसके बाद से कभी भी साम्राज्य उबर नहीं पाया और 1453 में इसकी सत्ता पूरी तरह से समाप्त हो गई।आपको बता दें कि बीज़ान्टिन के पतन के बाद ऑटोमोन साम्राज्य की स्थापना हुई जिसने 700 से अधिक साल शासन किया।

ऑटोमन साम्राज्य की स्थापना 1299 में हुई जबकि 1453 में कुस्तुन्तुनिया की जीत के साथ कुस्तुन्तुनिया इसकी राजधानी हो गयी। कुस्तुन्तुनिया आज इस्तांबुल के नाम से जाना जाता है।

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