नई दिल्ली: हमने देखा है कि जब कभी भी हम हौसले में कमज़ोर होते हैं या किसी लक्ष्य के पीछे चलते चलते थका हुआ महसूस करते हैं तो हमारे क़रीबी ही हमारा सहारा बनते हैं. माँ-बाप अपने बच्चों को ऐसे समय में सँभालते हैं. कुछ इसी तरह का वाक़या हुआ एक ऐसे व्यक्ति के साथ जिसने इस बार UPSC परीक्षा पास की है. शाहिद रज़ा ख़ान की इस बार 751वीं रैंक आयी है और वो सिविल सेवा में चयनित हुए हैं. शाहिद के परिवार में इस ख़बर से ख़ासी ख़ुशी है.

दो बार जब वो अपनी परीक्षा में कुछ नंबरों से चूक गए तब उनकी माँ ने उन्हें हौसला दिया और कहा-“डीएम साहब, इतनी जल्दी हिम्मत हार गए? मैं आपको रोता नहीं देख सकती, आप वापस घर आ जाओ”. बच्चे को नाकाम होते देख माँ-बाप को थोड़ा तो बुरा लगता है लेकिन इस समय अगर बच्चे को हौसला दे दें तो बात अच्छी हो सकती है. माँ से मिले हौसले ने बच्चे को सहारा दिया और उन्होंने कामयाबी हासिल की. शाहिद जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे हैं. UPSC में उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट उर्दू साहित्य था.

इस विषय में उनकी गहरी रूचि थी. बिहार बोर्ड से मैट्रिक की परिक्षा पास करने के बाद उन्होंने मदरसे में पढ़ाई की. शाहिद का मानना है कि ऑप्शनल सब्जेक्ट का समझदारी से चुनाव आपकी राह आसान कर देता है. उन्हें ग़ज़लें कहने का भी शौक़ है.शाहिद के मुताबिक़ कामयाब होने के लिए एनसीईआरटी किताबें बेस्ट हैं.अपनी पहली दो कोशिशों में नाकामयाब रहने वाले शाहिद ने जामिया की RCA कोचिंग कर रहे थे. शाहिद करेंट अफेयर्स को पीटी का दूसरा अहम पहलू मानते हैं. उनका कहना है कि ज्यादातर सवाल उनसे जुड़े होते हैं लिहाजा करेंट अफेयर्स की अनदेखी नहीं की जा सकती. मेंस को लेकर उन्होंने बताया कि इसमें बुलेट पॉइंट और डायग्राम का इस्तेमाल होना चाहिए. ऑप्शनल उर्दू साहित्य के लिए उन्होंने मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के एमए फर्स्ट और सेकेंड ईयर के मैटेरियल को बेहतरीन बताया है.

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