UP में फिर हो सकती है सपा-बसपा की दोस्ती? मायावती के इस क़दम ने किया हैरान..

January 19, 2021 by No Comments

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत को दिल्ली बैठकर समझा नहीं जा सकता. कहा जाता है कि यहाँ का छोटे से छोटा नेता अपने राजनीतिक दाँव-पेंच बहुत समझदारी से चलता है. वो भले किसी चुनाव में हार जाए लेकिन वो हार मानता नहीं है और फिर से जीतने की संभावनाएँ तलाशता है. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव तो 2021 में है लेकिन इसको लेकर चर्चाएँ ज़ोरों पर हैं. चुनाव की बुनियाद तैयार होना शुरू हो गई है और ये तब ज़्यादा नज़र आया जब उत्तर प्रदेश में विधानपरिषद की 12 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा हुई.

28 जनवरी को होने वाले इस चुनाव में नामांकन के आख़िरी दिन तक कुल 13 प्रत्याशियों ने पर्चा दाख़िल किया है. इनमें से 10 भाजपा के चुनाव निशान पर मैदान में हैं तो 2 समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव में भाग लेंगे. 13वें प्रत्याशी निर्दलीय हैं लेकिन कोई भी विधायक उनका प्रस्तावक नहीं है तो उनका पर्चा ख़ारिज होना लगभग तय है. इस तरह से 10 भाजपा के और 2 सपा के एमएलसी चुने जाना तय ही माना जाएगा. सवाल लेकिन ये है कि चुनाव में बसपा ने सपा को वाकओवर क्यूँ दे दिया.

एक और अहम् बात ये भी है कि बसपा की ओर से 2 नामांकन पत्र ख़रीदे गए थे लेकिन पार्टी की ओर से कोई भी उम्मीदवार सामने नहीं आया. अगर बसपा मैदान में उतरती तो वोटिंग भी करानी पड़ती और ऐसे में सपा के लिए 2 सीटों पर जीतना टेढ़ी खीर हो जाता. मायावती के इस फ़ैसले के पीछे कई बातें मानी जा रही हैं. एक तो ये कि शायद वो इस उम्मीद में हैं कि सपा से फिर से गठबंधन हो सकता है.

बसपा और सपा में अब पहले जैसी लड़ाई नहीं है. विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ऐसा संभव है कि बसपा और सपा सरकार बनाने के लिए गठबंधन कर लें. बसपा नेताओं को मालूम है कि फ़िलहाल वो ख़ुद तो जीतने की स्थिति में हैं नहीं और अगर भाजपा के समर्थन से एक एमएलसी बना भी ले गए तो विधानसभा में इसका बड़ा नुक़सान उठाना पड़ सकता है.

बीजेपी की ओर से उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, पूर्व आईएएस अरविंद कुमार शर्मा, कुंवर मानवेन्द्र सिंह, गोविन्द नारायण शुक्ला, सलिल विश्नोई, अश्वनी त्यागी, धर्मवीर प्रजापति, सुरेन्द्र चौधरी और लक्ष्मण आचार्य मैदान में है, जिनका निर्विरोध चुना जाना तय है. वहीं, सपा की ओर से अहमद हसन और राजेंद्र चौधरी का उच्च सदन पहुंचना तय माना जा रहा है.

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