अंकारा: लम्बे समय से तुर्की और अमरीका के बीच सीरिया में एक सेफ़ ज़ोन बनाने को लेकर बात चल रही थी. कुछ न कुछ मतभेद हो जाने की वजह से इस बातचीत का कोई अंतिम नतीजा नहीं निकल रहा था. अब ख़बर है की बातचीत सकारात्मक दिशा में है. आपको बता दें कि बुधवार के रोज़ तुर्की और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच उत्तर-पूर्व सीरिया में एक सेफ़ ज़ोन बनाया जाए.

तुर्की चाहता है कि सेफ़ ज़ोन ३२ किलोमीटर का होना चाहिए जबकि अमरीका 14 किलोमीटर के ज़ोन पर सहमति जता रहा था. उल्लेखनीय है की तुर्की के दक्षिण में जो हालात बन रहे हैं वो चिंता का विषय हहिं. इस बारे में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एरदोगन ने कहा कि जब तक देश के दक्षिण में बन रहे हाला’त को ठीक नहीं किया गया तुर्की सेफ़ फील नहीं कर सकता है.

उन्होंने दक्षिण तुर्की बॉर्ड’र पर कुर्द ल’ड़ाकों को कैंस’र बताया है. आपको बता दें कि इन ल’ड़ाकों को अमरीका का समर्थ’न हासिल है. एरदोगन कहते हैं कि अगर हमने आज ज़रूरी क़’दम नहीं उठाये तो आने वाले दिनों में हमें भा’री क़ी’मत चुकानी होगी. उनके इस बयान के बाद अमरीकी ओर से भी तीख़ी प्रतिक्रया आयी थी. इस मामले को समझते हुए अमरीका ने तुर्की को ध’मकी भी देने की कोशिश की थी.

अमरीका ने अपने बयान में कहा कि किसी भी तरह का एकपक्षीय फ़ैस’ला ब’र्दाश्त न होगा. उन्होंने कहा कि हम इसे रो’केंगे. अमरीका और तुर्की लम्बे समय से उत्तरी सीरिया में सुरक्षि’त क्षे’त्र को लेकर बात कर रहे हैं. ये बात्चीर यूफ्रातेस नदी के पूर्वी छोर के लिए है. असल में तुर्की अपने आस-पास के क्षेत्र में किसी तरह की हिं’सा नहीं चाहता है. पश्चिम एशिया में बन रहे हालात को लेकर तुर्की चिं’तित है. इसके अतिरिक्त लम्बे समय से एरदोगन अपने आपको मु’स्लिम समाज का नेता साबित करते रहे हैं. वो अपनी छवि को म’ज़बूत करने की कोशिश हमेशा करते ज़र आते हैं.

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