तेल की क़ीमतों को लेकर ओपेक ने नहीं सुनी भारत सरकार की बात, तेल की क़ीमतों पर..

March 6, 2021 by No Comments

नई दिल्ली: कई दिनों से भारत में डीज़ल और पेट्रोल की कीमतें आम आदमी के लिए बोझ जैसी बन गई हैं. भारत सरकार की ओर से ओपेक से ये माँग की गई थी कि ओपेक (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) और उनके सहयोगी देश तेल का उत्पादन बढ़ा दें. ओपेक देशों ने ऐसा करने से साफ़ इनकार कर दिया है. आपको बता दें कि तेल कंपनियों ने पिछले पांच वर्षों से की’मतें नहीं बढ़ाई.

भारत ने महंगे तेल को लेकर ओपेक और उसके सहयोगी देशों से उत्पादन पर लगे प्र’तिबंधों में छूट दिए जाने को लेकर निवेदन किया ताकि आपूर्ति बढ़ सके और कीमतों में गि’रावट आए लेकिन “ओपेक” ने भारत की इस अपील को मानने से मना कर दिया. दूसरी तरफ ओपेक+ देशों द्वारा अप्रैल में आपूर्ति नहीं बढ़ाने का फैसला लिए जाने के बाद शुक्रवार को इसकी कीमत 1 फीसदी बढ़कर 67.44 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई.

भारतीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने ओपेक देशों से गुरुवार को आ’ग्रह किया था कि कच्चे तेल के दाम में स्थिरता लाने के लिये वह उत्पादन पर लागू प्र’तिबंधों को कम करें. धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर तेल की बढ़ती कीमतों के चलते आर्थिक स्थिति क’मज़ोर हो रही है. इसे ठीक करने के लिए क़ीमतों का स्थिर रहना जरूरी है.

पिछले साल कोरोना महामारी के समय तेल की मांग लगभग शून्य हो जाने के चलते भारत ने ओपेक+ देशों द्वारा क्रूड उत्पादन में क’टौती किए जाने का समर्थन किया था. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक उस समय ओपेक ने 2021 की शुरुआत से सामान्य उत्पादन करने की बात कही थी लेकिन अभी तक ऐसा नही हुआ. भारत के आग्रह पर सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलाअजीज बिन सलमान ने कहा कि “भारत ने पिछले वर्ष बहुत सस्ती कीमतों पर कच्चे तेल खरीद कर उनका भं’डारण किया हैं. भारत को अभी उसी तेल का इस्तेमाल करना चाहिए. और लोगों को राहत पहुंचानी चाहिए”.

बता दें कि, भारत ने पिछले वर्ष अप्रैल-मई में 16.71 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा था. इन कच्चे तेलों की खरीद 19 डॉलर प्रति बैरल की रेट पर की गई थी. यह बात पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 21 सितंबर 2020 को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताई थी.

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