काबुल. अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान ने पूरी तरह क़ब्ज़ा कर लिया है और जल्द ही ये साफ़ होगा कि देश में किस तरह की सरकार बनेगी. तालिबान सरकार को किन देशों की मान्यता मिलेगी, ये कहना अभी मुश्किल है लेकिन चीन और रूस जैसे देशों के नेताओं ने जो बयान दिए हैं उससे लगता है कि वे तालिबान से ख़ुश हैं.

रूसी सरकार द्वारा जारी किए गए बयानों से लगता है कि वे तालिबान शासन को समर्थन देने जा रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान में रूस के राजदूत ने दावा किया है कि तालिबान ने पहले की अपेक्षा काबुल को ज्यादा सुरक्षित कर दिया है. रूस ने काबुल में अपने दूतावास को ख़ाली न करने की बात कही है. रूसी सरकार को तालिबान पर पूरा भरोसा है कि वे उनके लोगों को सुरक्षा प्रदान करेंगे.

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के बाद अब इस बात को लेकर अटकलें लग रही हैं कि तालिबानी सरकार दुनिया से अलग-थलग रहेगी या फिर उसे कुछ देशों का साथ मिल जाएगा. चीन और रूस की ओर से जारी बयान इस तरफ़ इशारा करते हैं कि वे तालिबानी सरकार को मान्यता दे सकते हैं. काबुल में रूसी दूतावास की प्रवक्ता निकिता आईचेंको ने कहा- अशरफ़ अली ग़नी ने काबुल छोड़ दिया है। चार कारों और एक हेलिकॉप्टर में कैश रखा गया था।

उन्होंने कहा,”ये इतना ज्यादा था कि इनमें समा नहीं पाया। इसलिए कुछ कैश काबुल एयरपोर्ट पर ही छोड़ दिया गया। बाद में न्यूज एजेंसी से बातचीत में भी निकिता ने यही बयान दोहराया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास यह जानकारी चश्मदीदों के हवाले से आई है।”

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अफ़ग़ान मामलों पर स्पेशल एडवाइजर जामिर काबुलोव ने रविवार को कहा था- हम नहीं जानते कि भागने वाली सरकार देश के लिए कितना पैसा छोड़कर गई है। उम्मीद करते हैं कि कुछ पैसा तो वो जरूर यहां छोड़कर गए होंगे, क्योंकि पूरा कैश ले जाना मुमकिन नहीं था।

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