काबुल: अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का पूरी तरह से क़ब्ज़ा हो गया है. राष्ट्रपति अशरफ़ अली ग़नी के देश छोड़ने के बाद तालिबान ने राजधानी काबुल पर क़ब्ज़ा कर लिया. इसके बाद अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों ने अपने नागरिकों और दूसरे अफ़ग़ान्स को देश से निकालने के लिए प्रयास करने शुरू कर दिए और काबुल एअरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया.


इसके बाद ये भी ख़बर आयी कि अमरीकी सेना ने काबुल एअरपोर्ट पर हवा में फायरिंग की है जिससे कि भगदड़ न मचे. काबुल एअरपोर्ट पर पाँच लोगों के मरने की ख़बर है, अभी तक ये नहीं पता चल पाया है कि मौत की वजह भगदड़ थी या फिर वो मौत गोली लगने से हुई है. एक तरफ़ जहाँ पश्चिम देश एम्बैसी से स्टाफ और अपने नागरिकों को काबुल से बाहर निकालने में लगे हैं वहीं दूसरी ओर चीन और रूस ऐसा कोई काम नहीं कर रहे हैं.

चीन अपने नागरिकों को अफ़ग़ानिस्तान से निकालने को लेकर कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखा रहा है. चीन ने अपनी एम्बसी के लोगों को भी एम्बसी में ही रहने की सलाह दी है और कहा है कि सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और बाहर न निकलें. हालाँकि चीन की तरफ़ से साफ़ है कि वह अभी इस तरह की कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाने वाला है.


इस बीच एऍफ़पी के सौजन्य से ख़बर है कि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुन्यिंग ने कहा है कि चीन चाहता है कि अफ़ग़ान लोग अपना भविष्य ख़ुद तय करें. साथ ही चीन ने ये भी कहा है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के साथ दोस्ताना सम्बन्ध रखना चाहता है.

चीन के बयान से लगता है कि वो अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता दे सकता है. जिन देशों ने अब तक अपनी काबुल एम्बसी को बंद नहीं किया है उनमें चीन के अलावा रूस, भारत और पाकिस्तान का नाम भी शामिल है.

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