देश में रि’श्वत माँ’गने और दे’ने के क़ि’स्से आम हैं। कई बार ये सुनने में आता है कि लोगों का काम अ’टका हुआ है क्योंकि उनके पास रि’श्वत देने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में लोगों को कितनी मुश्कि’लों का साम’ना करना पड़ता है ये बस वही जानता है जिसे इस सम’स्या से दो- चार होना पड़ता है। लेकिन कई बार कुछ लोग रि’श्वत माँ’गने वाले को ऐसा सबक़ सिखाते हैं कि लोगों के दिलों को राहत मिलती है। ऐसा ही एक वाक़या सामने आया है जिसे सुनकर लोगों को मज़ा आ रहा है।

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के सिरौंज के किसान भूपेन्द्र सिंह को अपनी परिवारिक जमीन का नामकरण करवाना था| जिसके लिए वे तहसील कार्यालय के कई दिन से च’क्कर लगा रहे थे|लेकिन उनका काम ही नहीं हो रहा था क्योंकि तह’सील कार्यालय में उनसे 25 हजार की रि’श्वत मां’गी गई, जिसे देने में वे अस’मर्थ थे|आख़िर जब बार-बार च’क्कर लगाने से काम नहीं बना तो किसान भूपेन्द्र सिंह ने एक अलग रास्ता निकाला और अपनी भैंस ही नायब तह’सीलदार की गाड़ी में बां’ध दी|

तहसीलदार की कार से बंधी भैंस

इस मामले के सामने आने के बाद से लोग इस पर च’र्चा कर रहे हैं। भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि “मैं कई दिनों से नायब तहसीलदार के पास आ रहा हूं, लेकिन तहसीलदार कार्यालय में काम के बदले 25 हजार रूपये की रि’श्वत की मां’ग की गई जो मेरे पास नहीं है, इसलिए मैंने अपनी भैंस देने का फ़ै’सला किया”।

जब इस बा’बत तह’सीलदार से बात की गयी तो नायाब तह’सीलदार सिद्धार्थ सिंगला ने इन आ’रोप को न’कारते हुए कहा कि किसान ऐसा अपनी पब्लि’सिटी के लिए कर रहा है| हालांकि नायब तह’सीलदार सिद्धार्थ सिंगला पर पहले भी कई आ’रोप हैं| जब सिद्धार्थ सिंगला से भूपेन्द्र के ज़मीन के काम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ न कहते हुए चु’प्पी साध ली| किसान भूपेन्द्र सिंह ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री (कमल नाथ) के नाम एसडीएम को एक ज्ञा’पन सौंपकर इस मामले में का’र्यवाही की मां’ग की है| माम’ला सामने आने के बाद किसान अपनी भैंस लेकर वाप’स चला गया|

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