सुशांत की मौ’त में अपना फ़ायदा तलाशते गो’दी मीडिया हाउस, झूठ और मक्कारी की..

August 3, 2020 by No Comments

एक समय था कि लोग समाचार चैनल देखते थे कि उन्हें कुछ अच्छी जानकारी मालूम हो जाए. बच्चों से कहा जाता था कि अपनी जीके को ठीक करने के लिए न्यूज़ चैनल देखें. समाचार में देश ओ दुनिया की जानकारी होती थी, स्पोर्ट्स की जानकारी और साथ ही मनोरंजन की ख़बर भी होती थी. इसके बाद मौसम का विश्लेषण भी होता था लेकिन आज टीआरपी जीतने के चक्कर में मीडिया ने बुराई की सभी हदें ख़त्म कर दी हैं. पिछले कुछ सालों में मीडिया अपने आपको अलग ही दुनिया का मानने लगा है. इसमें एंकर झूठ, मक्कारी की सभी हदें तोड़ रहे हैं.

हाल ही में विकास दुबे नामक एक गैन्स्टर का आतंक रहा और फिर जब मध्य प्रदेश में उसने सरेंडर कर दिया तो एक एंकर ने उन सभी लोगों का भद्दा मज़ाक़ उड़ाया जो कह रहे थे कि इसमें बड़े लोग बच जायेंगे क्यूंकि उसका एनकाउंटर हो जाएगा. एंकर बार-बार ये कहता है कि कह रहे थे एनकाउंटर होगा कहाँ हुआ. पर अगली सुबह ही ख़बर आयी कि दुबे का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया. बेशर्मी इस लेवल पर जा चुकी है कि बजाय अपनी चीख़ को कम करने के और बढ़ा दी गई और कहा गया कि क्या विकास दुबे जैसों का एनकाउंटर नहीं होना चाहिए था.

मीडिया में एक ऐसा वर्ग तैयार हो गया है जिसने अब हर क़ीमत पर सच को दबाने की ठान ली है. और कहा ये जाता है कि वो जो कर रहे हैं सच को उजागर करने के लिए कर रहे हैं. सुशांत सिंह राजपूत की मौ’त को लेकर भी मीडिया के एक वर्ग ने जो तमाशा किया है वो भारतीय मीडिया इतिहास में सबसे बुरे दौर का अध्याय ही है. बॉलीवुड के उभरते सितारे सुशांत की 14 जून को मौ’त हो गई, इसके बाद मीडिया के एक वर्ग में बजाय सच जानने के बस इस बात पर चर्चा होने लगी कि किस तरह से इसमें उन लोगों का नाम शामिल हो जिनसे उनकी टीआरपी बढ़ती है.

जो लोग सुशांत से कभी नहीं मिले थे, वो लोग सुशांत के हमदर्द हो गए और जिन लोगों ने सुशांत को अपनी फ़िल्मों में काम दिया था वो लोग दुश्मन से दिखाए जाने लगे. स्थिति ये हो गई कि हर वो परिवार जिसका बॉलीवुड में कुछ नाम है, उसको इसमें ज़बरदस्ती घसीटा जाने लगा. कोई तो ये भी कहने लगा कि सुशांत की प्रेमिका रिया चक्रावर्ती को बॉलीवुड के मशहूर प्रोडक्शन हाउस ने उनकी ज़िन्दगी में डाला है. मानो बॉलीवुड फ़िल्मकारों के पास दूसरों की ज़िन्दगी में दख़ल देने के अलावा कुछ बचा ही नहीं है.

सुशांत से पहले सुशांत की मैनेजर दिशा सालियान की मौ’त हुई थी. 8 जून को दिशा एक पार्टी के दौरान बिल्डिंग से गिर गईं थीं जिसके बाद उनका देहांत हो गया. मीडिया इस मामले को बिलकुल इग्नोर करके बैठा था और इस पर कोई ज़िक्र नहीं करना चाहता था. इसकी वजह ये थी कि इसमें उसे पॉपुलैरिटी नहीं दिख रही थी. दिशा की मौ’त को लेकर जाँच की माँग बहुत दिन से हो रही थी लेकिन मीडिया इसको एकदम से छुपाए बैठा था. आख़िर मीडिया को एक थ्योरी मिल गई और फिर तो उसने इसको मुद्दा बना लिया.

किसी ने किसी चैनल पर आके बोल दिया कि दिशा जिस पार्टी में छत से गिरीं उसमें एक नेता का बेटा भी था. इसके बाद तो जाने क्या क्या कहा गया. ऐसी ऐसी बातें बोल दी गईं जिनका कोई मतलब ही नहीं था. इत्तिफ़ाक़ से इस नेता के बेटे का जन्मदिन 13 जून को था और 14 को सुशांत की मौ’त हो गई. अब ये थ्योरी निकाल ली कि 13 की रात पार्टी हुई और इसी पार्टी के दौरान सुशांत की मौ’त की प्लानिंग हुई. महत्वपूर्ण बात ये है कि जिसके मुँह में जो आ रहा है बक रहा है लेकिन किसी बात का कोई सबूत नहीं है, कोई तुक नहीं है. सुशांत की मौ’त से राजनीतिक फ़ायदा और व्यक्तिगत दुश्मनी का बदला लेने की कोशिश ही हो रही है. मज़े की बात है कि जिस रिया चक्रावर्ती को ये अब तक दुश्मन बता रहे थे अचानक ही उसका नाम ग़ायब कर दिया गया है.

ज़ाहिर है जब इनको जो फ़ायदे का लगता है वो ये करते हैं. सुशांत सिंह राजपूत से न इनकी कोई हमदर्दी थी और न ही इन्होने सुशांत की फ़िल्में उस समय देखी ही होंगी. मीडिया के नाम पर इन्होने एक मंडी खोल रखी है जहाँ ये सच बेचते हैं और सच बिकवाते हैं.

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