सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फ़ैसला,”पर्सनल प्रॉपर्टी नहीं है पत्नी, साथ रहने के लिए…”

March 4, 2021 by No Comments

नई दिल्ली: गोरखपुर के एक व्यक्ति की याचिका पर फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम (एचएमए) की धारा 9 के तहत पुरुष के पक्ष में संवैधानिक अधिकारों की बहाली पर 1 अप्रैल 2019 को आ’देश दिया था. इस फैसले के बाद फैमिली कोर्ट में पत्नी ने कहा कि साल 2013 में शादी के बाद से ही पति ने द’हेज के लिए उसे प्र’ताड़ित किया. इसके बाद वह अपने पति से अलग हो गई. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें पति ने कोर्ट से मांग की थी कि पत्नी को दोबारा साथ रहने और फिर से एकसाथ जिंदगी बिताने का आदेश दिया जाए.

याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि ‘आपको क्या लगता है? क्या पत्नी कोई व’स्तु है, जो हम ऐसा आदेश दे सकते हैं? क्या बीवी कोई चल सं’पत्ति है, जिसे हम आपके साथ जाने का आदेश पारित करेंगे?’ सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि पत्नी कोई ‘चल संपति ’ या एक ‘ वस्तु ’ नहीं है. पति की अगर अपनी पत्नी को साथ रखने की इच्छा भी है तो उसे साथ रहने के लिए म’जबूर नहीं कर सकता है.

बता दें कि पत्नी ने साल 2005 में गुजारा भत्ता के लिए कोर्ट में अर्जी दी. कोर्ट ने पति को 20 हजार रुपये प्रति माह पत्नी को गु’जारा भत्ता देने का आदेश दिया. पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर अपने संवैधानिक अधिकारों को बचाने की मांग की लेकिन फैमिली कोर्ट ने दूसरी बार भी अपने आदेश को जारी रखा. इसके फैसले के विरोध में पति इलाहाबाद हाईकोर्ट भी गया. लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए केस को खा’रिज कर दिया. लेकिन आखिर में पति ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दाखिल की.

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